सावन और भादों के त्योहारी सीजन में आम जनता पर महंगाई की दोहरी मार पड़ी है। रक्षाबंधन और जन्माष्टमी जैसे प्रमुख पर्वों से ठीक पहले रोजमर्रा की जरूरी खाद्य वस्तुओं—प्याज और चीनी—की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है। लखीमपुर खीरी की मैगलगंज मंडी में एक महीने के भीतर प्याज का थोक भाव दोगुने से भी अधिक होकर 50 से 55 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है, जिसका सीधा असर फुटकर बाजार पर पड़ा है। वहीं, चीनी के दाम 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने से त्योहारों की मिठास पर महंगाई का साया मंडराने लगा है।
प्याज की कीमतों में 107% का उछाल, थाली से सलाद गायब
मंडी में एक महीने पहले 20 से 22 रुपये प्रति किलो बिकने वाला प्याज अब थोक में 50 से 55 रुपये पहुंच गया है, जो औसतन करीब 107 प्रतिशत की वृद्धि है। इसका सीधा प्रभाव खानपान व्यवसाय पर भी पड़ा है: होटल कारोबारी के अनुसार, प्याज के बढ़े दामों के कारण सब्जियों और सलाद में प्याज की मात्रा कम करनी पड़ रही है, जिससे ग्राहकों को सामान्य मात्रा में प्याज परोसना महंगा पड़ रहा है। थोक विक्रेता ने बताया कि वर्तमान में प्याज इंदौर से आ रहा है। कर्नाटक में नई फसल की कीमतें भी अधिक हैं और मंडियों में नई आवक सामान्य होने में अभी करीब दो महीने का समय लग सकता है।
फुटकर में प्याज ₹60 पार, मंडियों और फेरीवालों का कारोबार प्रभावित
फुटकर दुकानों और चौराहों पर प्याज 50 से 60 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। एक सप्ताह पूर्व 40 रुपये में दो किलो मिलने वाला प्याज अब 60 रुपये प्रति किलो मिल रहा है। मंडी के थोक विक्रेता के अनुसार, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश से आवक घटने के कारण दाम बढ़े हैं। पहले जहां एक ट्रक माल एक-दो दिन में बिक जाता था, अब चार-पांच दिन लग रहे हैं। सब्जी बेचने वाले राधेश्याम साहू ने बताया कि गांवों में पहले रोजाना 8 से 10 बोरी प्याज बिकता था, लेकिन अब लोग केवल आधा या एक किलो ही खरीद रहे हैं।

चीनी ₹75 किलो पहुंची, त्योहारों के पकवानों पर असर
चीनी का फुटकर भाव 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने से सावन और भादों के त्योहारों पर बनने वाली मिठाई, सेवईं और अन्य पकवानों का बजट बिगड़ गया है।
गृहिणी रेखा यादव और सुमन सिंह का कहना है कि गैस सिलेंडर के बाद अब चीनी और प्याज के दाम बढ़ने से रसोई का पूरा मासिक बजट प्रभावित हो गया है।आम नागरिकों और परिवारों ने सरकार से त्योहारों के सीजन को देखते हुए चीनी और प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने और राहत देने की मांग की है।

