नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने घरों में पाइप वाली रसोई गैस (PNG) की पहुंच और इस्तेमाल बढ़ाने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जिला स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए हैं। ये अधिकारी गैस वितरण कंपनियों और पेट्रोलियम विपणन कंपनियों के साथ समन्वय कर उन घरों को PNG से जोड़ने में मदद करेंगे, जहां पाइपलाइन की सुविधा पहले से उपलब्ध है।
पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने 21 अगस्त को राज्यों के मुख्य सचिवों को भेजे पत्र में कहा कि PNG सुरक्षित, स्वच्छ और सुविधाजनक ईंधन है। इसके इस्तेमाल से घरेलू LPG सिलेंडरों की ढुलाई का बोझ कम होगा और शहरों में तैयार गैस वितरण ढांचे का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।
PNG उपलब्ध होने पर LPG और PNG दोनों कनेक्शन नहीं
सरकार ऐसे क्षेत्रों में LPG से PNG की ओर बदलाव को तेज करना चाहती है, जहां पाइप वाली गैस की सुविधा पहुंच चुकी है। नए नियामकीय प्रावधानों के तहत ऐसे इलाकों में परिवारों को LPG और PNG दोनों कनेक्शन एक साथ रखने की अनुमति नहीं होगी।
नोटिस दिए जाने के बाद PNG कनेक्शन के लिए आवेदन नहीं करने वाले उपभोक्ताओं की LPG आपूर्ति बंद की जा सकती है। इसके लिए प्रत्येक भौगोलिक क्षेत्र में PNG समन्वय समिति (PCC) गठित की जाएगी।
जिला प्रशासन की होगी अहम भूमिका
PCC आवासीय सोसायटियों और पात्र घरों की पहचान करेगी। इसके अलावा उपभोक्ताओं को नोटिस जारी करने, जागरूकता अभियान चलाने और PNG कनेक्शन के लिए शिविर आयोजित करने का काम किया जाएगा।
केंद्र ने कहा है कि PCC व्यवस्था पहले से लागू है, लेकिन इसे समयबद्ध तरीके से लागू करने के लिए जिला प्रशासन का सहयोग जरूरी है। राज्यों से खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को इस काम के लिए नामित करने को कहा गया है। प्रत्येक जिले में कम से कम जिला आपूर्ति अधिकारी स्तर के एक अधिकारी को PCC से जोड़ा जाएगा।
RWA और आवासीय समितियों से भी सहयोग
जिला प्रशासन को रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) और आवासीय समितियों के साथ समन्वय कर पाइपलाइन बिछाने के लिए रास्ता उपलब्ध कराने, LPG वितरकों और गैस वितरण कंपनियों के बीच तालमेल कराने तथा उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान में मदद करनी होगी।
पश्चिम एशिया संकट के बाद PNG पर जोर
सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब इस साल पश्चिम एशिया में संकट के दौरान LPG आपूर्ति प्रभावित हुई थी। भारत घरेलू LPG की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है और पश्चिम एशिया से आने वाली आपूर्ति समुद्री मार्गों पर निर्भर रहती है।
संकट के दौरान घरेलू LPG आपूर्ति को प्राथमिकता देनी पड़ी थी। इसके मुकाबले घरेलू PNG आपूर्ति पर असर अपेक्षाकृत कम रहा। घरेलू PNG क्षेत्र को देश में उत्पादित प्राकृतिक गैस की प्राथमिकता वाली आपूर्ति मिलने के कारण यह संकट से काफी हद तक बचा रहा।
सरकार का मानना है कि PNG का विस्तार करने से खाना पकाने के लिए LPG पर निर्भरता कम होगी और भारत की ऊर्जा आपूर्ति अंतरराष्ट्रीय संकट तथा समुद्री परिवहन में होने वाले व्यवधानों के प्रति अधिक मजबूत बनेगी। केंद्र ने राज्यों से इस अभियान को प्राथमिकता देते हुए समयबद्ध तरीके से PNG की स्वीकार्यता बढ़ाने को कहा है।

