बलरामपुर जिले में इन दिनों शिक्षा विभाग के अंतर्गत हुई खरीदी को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) का पक्ष बेहद मजबूत और स्पष्ट सामने आया है। साइकिल, फर्नीचर, साइंस किट और स्वच्छता सामग्री जैसी विभिन्न सामग्रियों की यह पूरी खरीदी शासन स्तर से स्वीकृत क्रय आदेशों के आधार पर पूरी तरह ऑनलाइन और निर्धारित नियमों के तहत की जाती है । सामग्री मिलने के बाद उसकी पावती, भौतिक सत्यापन और गुणवत्ता प्रमाण-पत्र जैसी तमाम जरूरी औपचारिकताएं पूरी की जाती है , जिसके बाद नियमानुसार भुगतान के लिए देयक जिला कोषालय कार्यालय बलरामपुर को प्रेषित किए गए है ।
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विभागीय जानकारों का कहना है कि जहां जिला कोषालय सामान्य और छोटे भुगतानों पर भी कड़ी आपत्तियां दर्ज करता है, वहां इतनी बड़ी शासकीय राशि के भुगतान से पहले कोषालय द्वारा दस्तावेजों का सूक्ष्म परीक्षण अवश्य किया गया होगा। खुद जांच दल में एक सदस्य के रूप में जिला कोषालय अधिकारी के शामिल होने पर यह सवाल प्रासंगिक हो जाता है कि इस प्रक्रिया में कोषालय की अपनी भूमिका भी उतनी ही बड़ी जांच का विषय होनी चाहिए।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि डीईओ कार्यालय द्वारा खरीदी से जुड़ी समस्त मूल नस्तियां (Original Files) जांच दल को बिना किसी छिपाव के सौंप दी गई थीं, फिर भी उन पर गबन का आधारहीन आरोप मढ़ना पूरी तरह दुर्भाग्यपूर्ण है। डीईओ ने स्पष्ट किया है कि वे जांच दल के वरिष्ठ एवं जिम्मेदार अधिकारियों का सम्मान करते हैं, लेकिन उनके ऊपर लगाए गए इन बेबुनियाद आरोपों का एक-एक तथ्यात्मक और समाधानकारक जवाब अभिलेखों के साथ शीघ्र ही कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब जिले की शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए डीईओ द्वारा लगातार कड़े प्रशासनिक कदम उठाए जा रहे हैं। स्कूलों में शिक्षकों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने, नियमित मॉनिटरिंग करने और आम जनता को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए बिचौलियों के चक्कर काटने से मुक्ति दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। डीईओ की इस प्रशासनिक सख्ती और पारदर्शिता के कारण व्यवस्था में सुधार तो आया है, लेकिन इससे कुछ निहित स्वार्थी तत्वों और बिचौलियों की मुश्किलें जरूर बढ़ गई हैं।
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विभागीय सूत्रों का मानना है कि इन्हीं असहज तत्वों द्वारा जानबूझकर डीईओ की ईमानदार और कर्मठ छवि को धूमिल करने के लिए तरह-तरह की भ्रामक चर्चाएं फैलाई जा रही हैं। जब तक इस पूरे मामले की अंतिम और आधिकारिक रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती, तब तक नियमों के तहत पूरी पारदर्शिता से कार्य कर रहे जिला शिक्षा अधिकारी पर किसी भी प्रकार के आरोप लगाना पूरी तरह जल्दबाजी और अनुचित होगा।
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