बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन पर बड़ा फैसला: अब वजन के आधार पर तय होगा शुल्क, NOC प्रक्रिया होगी सरल
नई दिल्ली | 28 मार्च 2026
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा संचालित दुनिया की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली ‘आधार’ अब एक नए और अधिक सुलभ डिजिटल अवतार में नजर आने वाली है। केंद्र सरकार ने राज्यसभा में महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया है कि आधार प्रमाणीकरण को और अधिक सटीक बनाने के लिए अब ‘बहु-मॉडल प्रमाणीकरण’ (Multi-Model Authentication) प्रणाली को पूरी तरह सक्षम कर दिया गया है। इस आधुनिक व्यवस्था का सीधा लाभ उन करोड़ों नागरिकों को मिलेगा जिन्हें अक्सर फिंगरप्रिंट मैच न होने या खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी के कारण सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने में परेशानी होती थी। अब लाभार्थियों के पास फिंगरप्रिंट के अलावा ओटीपी और चेहरे की पहचान (Face Recognition) जैसे विकल्प भी मौजूद होंगे, जिससे सत्यापन की प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक निर्बाध और त्रुटिरहित हो जाएगी।
आधार आज के समय में केवल एक पहचान पत्र नहीं, बल्कि जन कल्याणकारी योजनाओं की लाइफलाइन बन चुका है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने सदन को बताया कि वर्तमान में देश में लगभग 134 करोड़ सक्रिय आधार धारक हैं और इस प्रणाली के माध्यम से अब तक 17,000 करोड़ से अधिक प्रमाणीकरण लेनदेन सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं। आधार की व्यापक स्वीकृति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केंद्र और राज्यों की 3,100 से अधिक प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) योजनाएं और 360 से अधिक सार्वजनिक सेवाएं सीधे तौर पर इस पर निर्भर हैं। इस पारदर्शी वितरण प्रणाली ने न केवल सरकारी लाभों को सीधे पात्र लाभार्थियों के खातों तक पहुँचाया है, बल्कि सिस्टम में मौजूद नकली और अपात्र नामों को बाहर कर सरकारी खजाने की भी बड़ी बचत की है।
अक्सर यह शिकायतें आती रही हैं कि तकनीकी खराबी या बायोमेट्रिक विसंगतियों के कारण पात्र लोगों को राशन या पेंशन जैसी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ता है। इस पर सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि आधार अधिनियम, 2016 के तहत यह अनिवार्य प्रावधान है कि किसी भी पात्र लाभार्थी को केवल आधार प्रमाणीकरण की विफलता के आधार पर उसके हक से वंचित नहीं किया जा सकता। ऐसी स्थितियों के लिए वैकल्पिक पहचान के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी तकनीकी बाधा के कारण सेवा वितरण न रुके। इसके साथ ही यूआईडीएआई ने अपने बुनियादी ढांचे को और अधिक मजबूत किया है और विवरणों को समय-समय पर अपडेट करने की प्रक्रिया को भी सरल बनाया है, जिससे भविष्य में प्रमाणीकरण संबंधी समस्याओं को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सके।
आधार की एक और बड़ी विशेषता इसकी गोपनीयता और सुरक्षा है, जहाँ यूआईडीएआई यह जानकारी कभी साझा या स्टोर नहीं करता कि किसी व्यक्ति ने अपनी पहचान का सत्यापन किस विशेष कार्य के लिए किया था। बैंकिंग, दूरसंचार और बीमा जैसे क्षेत्रों में आधार ने जिस तरह से सेवाओं तक पहुँच को आसान बनाया है, उसने भारत को वैश्विक स्तर पर डिजिटल पहचान के मामले में अग्रणी स्थान दिलाया है। सरकार के इस नए बहु-आयामी दृष्टिकोण से अब दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले उन बुजुर्गों और श्रमिकों को सबसे अधिक राहत मिलेगी जिनके फिंगरप्रिंट उम्र या मेहनत के कारण स्पष्ट नहीं रह गए थे, क्योंकि अब उनका चेहरा ही उनकी पहचान का सबसे मजबूत आधार बनेगा।
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