छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के ‘चार गढ़’: पांच साल में 400 से अधिक केस, घूसखोरी में राजस्व विभाग सबसे आगे, देखें जिलों का हाल

रायपुर। छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ सक्रिय एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) की जांच में एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के पिछले पांच वर्षों (वर्ष 2021 से 2026) के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में राजस्व, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय प्रशासन और वन विभाग भ्रष्टाचार के सबसे बड़े गढ़ बन चुके हैं।

बीते पांच वर्षों में इन जांच एजेंसियों ने रिश्वतखोरी, आय से अधिक संपत्ति और पद के दुरुपयोग के 400 से अधिक मामलों में बड़ी कार्रवाई की है। इस कार्रवाई की जद में पटवारी से लेकर बड़े इंजीनियर और मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) तक आ चुके हैं।

जमीन मामलों में पटवारी और तहसील कार्यालयों में जमकर घूसखोरी

आंकड़ों के अनुसार, सबसे बदतर स्थिति राजस्व विभाग की है। यहां नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और जमीन से जुड़े अन्य मामलों के निपटारे के एवज में पटवारियों और तहसील प्रभारियों द्वारा खुलकर घूस मांगी गई। सर्वाधिक शिकायतें पटवारियों और राजस्व निरीक्षकों (RI) पर ही दर्ज हुई हैं, जिन्हें काम के बदले रंगे हाथ रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया है।

राजस्व के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग भी भ्रष्टाचार की सूची में ऊपर है, जहां जनपद पंचायतों, ग्राम पंचायतों और मनरेगा (MGNREGA) कार्यों में जमकर कमीशनखोरी की शिकायतें मिली हैं। इसके चलते कई जिम्मेदार अधिकारी वर्तमान में जांच के दायरे में हैं।

इंजीनियर और सीएमओ भी निशाने पर, पूर्व मुख्य अभियंता की गिरफ्तारी से हड़कंप

नगरीय प्रशासन विभाग में भी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के इंजीनियर व सीएमओ के खिलाफ बड़ी कार्रवाइयां हुई हैं। हाल ही में नगरीय प्रशासन विभाग के पूर्व मुख्य अभियंता भागीरथ वर्मा की गिरफ्तारी ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन पर निविदा (टेंडर) आवंटन के बदले मोटी रिश्वत लेने और करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति अर्जित करने का गंभीर आरोप है। इसके अलावा वन विभाग, लोक निर्माण विभाग (PWD), शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग में भी समय-समय पर एसीबी ने शिकंजा कसा है।

रायपुर से सरगुजा तक ताबड़तोड़ छापेमारी

एसीबी की इस कार्रवाई का दायरा राजधानी रायपुर समेत सरगुजा, रायगढ़, बिलासपुर और सूरजपुर जैसे जिलों तक फैला हुआ है। हाल के वर्षों में कई बड़े मामलों में छापेमारी कर करोड़ों रुपये की चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों और निवेश से जुड़े दस्तावेज जब्त किए गए हैं। जांच अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में सिर्फ छोटे कर्मचारी ही नहीं, बल्कि कई वरिष्ठ अधिकारी भी सीधे तौर पर संलिप्त पाए गए हैं।

विभागवार कार्रवाई की स्थिति (फैक्ट फाइल):

  • राजस्व विभाग: कुल 56 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 67 लोगों को आरोपी बनाया गया। इनमें 34 पटवारी और 12 लिपिक (क्लर्क) शामिल हैं।

  • स्कूल शिक्षा विभाग: कुल 20 मामलों में 25 लोगों को आरोपी बनाया गया, जिसमें 3 प्राचार्य (प्रिंसिपल) और 10 लिपिक शिकंजे में आए।

  • ग्रामीण विकास विभाग: कुल 14 मामलों में 15 लोगों पर केस दर्ज हुआ। इनमें 3 सीईओ (CEO) और 3 अनुविभागीय अधिकारी शामिल हैं।

  • गृह विभाग: कुल 10 मामलों में 13 लोगों को आरोपी बनाया गया, जिसमें 6 एएसआई (ASI) और 3 हेड कांस्टेबल शामिल हैं।

इन जिलों में दर्ज हुए सबसे ज्यादा मामले:

  • सूरजपुर: 16 मामले दर्ज कर 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

  • सरगुजा: 12 मामले सामने आए, जिनमें 20 लोगों की गिरफ्तारी हुई।

  • रायपुर: 13 मामलों में कुल 15 आरोपियों को दबोचा गया।

  • रायगढ़: 11 मामले दर्ज कर 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

  • मुंगेली: 8 मामलों में 11 आरोपियों पर कार्रवाई की गई।

भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार और एसीबी लगातार अपने निगरानी तंत्र को मजबूत करने का दावा कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रदेश में रिश्वतखोरी और पद के दुरुपयोग के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।

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