वाराणसी:
भगवान शिव का अतिप्रिय सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही चारों तरफ भक्ति और उत्सव का माहौल छा गया है। पूरे सावन मास में पडने वाले सभी प्रमुख व्रत और त्योहारों में देवों के देव महादेव की विशेष प्रधानता रहेगी। इस वर्ष सावन के दौरान नागपंचमी, हरियाली तीज और रक्षाबंधन जैसे प्रमुख पर्वों के साथ-साथ चार सावन सोमवार और मंगला गौरी के व्रत सहित कुल 15 प्रमुख व्रत व त्योहार पड़ रहे हैं। इस बार सावन की शुरुआत भगवान श्रीहरि विष्णु के प्रिय दिन बृहस्पतिवार से हुई है, जबकि इसका समापन देवी के प्रिय दिन शुक्रवार को होगा।
प्रख्यात ज्योतिषविदों के अनुसार, इस सावन में एक बेहद अद्भुत और दुर्लभ धार्मिक संयोग बन रहा है। लगभग 23 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद सावन के सोमवार के दिन ही नागपंचमी का पावन पर्व पड़ रहा है। सावन का पहला सोमवार तीन अगस्त को है, जिसके बाद दूसरा सोमवार 10 अगस्त को पड़ेगा। 17 अगस्त को पड़ने वाले तीसरे सोमवार के दिन ही नागपंचमी का यह दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहा है, जबकि चौथा सोमवार 24 अगस्त को पड़ेगा।
इसके अलावा, माता पार्वती को समर्पित मंगला गौरी के व्रत 31 जुलाई, चार, 11, 18 और 25 अगस्त को रखे जा रहे हैं। सावन के अन्य प्रमुख धार्मिक पर्वों की बात करें तो कामिका एकादशी आठ अगस्त को, सावन की मासिक शिवरात्रि 11 अगस्त को, हरियाली अमावस्या 12 अगस्त को और हरियाली तीज का पर्व 15 अगस्त को मनाया जा रहा है। वहीं, पुत्रदा एकादशी 23 अगस्त को तथा भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन व श्रावण पूर्णिमा का पर्व 28 अगस्त को पड़ रहा है।
सावन के इस पावन मास में भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए देश भर में विविध धार्मिक यात्राओं और अनुष्ठानों का दौर भी जारी है। श्रद्धालु बड़ी संख्या में कांवड़ यात्रा, पंचक्रोशी परिक्रमा यात्रा, द्वादश ज्योतिर्लिंग दर्शन, वृहद त्रिशूल यात्रा, एकादश महारुद्र शिवलिंग दर्शन यात्रा और बैजनाथ धाम यात्रा में शामिल हो रहे हैं। इसके साथ ही विभिन्न मठों, मंदिरों, आश्रमों और धार्मिक प्रतिष्ठानों में श्रीमद्भागवत कथा, शिवपुराण, विष्णुपुराण और रामचरितमानस कथा के आयोजनों से पूरा माहौल भक्तिमय बना हुआ है।



