दक्षिण-पश्चिम मानसून के पहले महीने के अंतिम सप्ताह में प्रवेश करते ही भारत के कृषि प्रधान राज्यों में चिंताजनक स्थिति पैदा हो गई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के अनुसार, एक से 22 जून के बीच पूरे देश में सामान्य से 43 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। इस मानसून की सुस्ती का असर न केवल खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ रहा है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था और खाद्य महंगाई के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।

कृषि उत्पादन के मामले में अग्रणी राज्यों में हालात सबसे अधिक नाजुक बने हुए हैं। महाराष्ट्र में सामान्य से 82 फीसदी और गुजरात में 75 फीसदी कम बारिश हुई है। इसी तरह छत्तीसगढ़ में 69 फीसदी, झारखंड में 66 फीसदी, मध्य प्रदेश में 52 फीसदी और ओडिशा में 48 फीसदी की कमी देखी गई है। उत्तर प्रदेश, बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों में भी 43 फीसदी कम बरसात दर्ज हुई है, जबकि दक्षिण भारत के कर्नाटक और केरल में भी स्थिति सामान्य नहीं है।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मानसून के इस कमजोर रुख पर चिंता जताते हुए कहा कि देश के 315 जिलों में कम बारिश होने का अनुमान है, जिसका सीधा असर खरीफ फसलों पर पड़ेगा। हालांकि अब तक 1.17 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हो चुकी है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के 1.13 करोड़ हेक्टेयर से थोड़ा अधिक है, लेकिन पानी की कमी के कारण अब इन फसलों के जीवित रहने और आगे की बुवाई को लेकर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 111 जिलों को अति-संवेदनशील के रूप में चिन्हित किया है, जहां सिंचाई की सुविधाएं 25 फीसदी से भी कम हैं और किसान पूरी तरह बारिश पर निर्भर हैं। इनमें से अकेले 20 जिले महाराष्ट्र के हैं।

मानसून की इस बेरुखी ने भारतीय रिजर्व बैंक की चिंताओं को भी बढ़ा दिया है। आरबीआई ने पहले ही चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.6 फीसदी रहने का अनुमान जताया है, और मानसून की यह कमजोरी विकास दर को और नीचे खींच सकती है। इसके साथ ही खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों के बीच महंगाई दर 5.1 फीसदी रहने का अनुमान है, लेकिन यदि खरीफ फसलों के उत्पादन में गिरावट आती है, तो चावल, दाल और सब्जियों के दाम तेजी से बढ़ने का खतरा बढ़ जाएगा।

इस आपदा से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने आपातकालीन तैयारियां शुरू कर दी हैं। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया है कि संवेदनशील और कम सिंचाई वाले इन 111 जिलों के लिए विशेष जल प्रबंधन रणनीति अपनाई जा रही है। सरकार कम पानी में तैयार होने वाली फसलों के बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ ही बिजली और पानी की सुचारू आपूर्ति पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। कृषि मंत्री ने विश्वास दिलाया है कि सरकार सुनिश्चित करेगी कि खेत खाली न रहें और उपलब्ध पानी के अनुसार फसलों की बुवाई को प्राथमिकता दी जाएगी।

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