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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में वामपंथी उग्रवाद के विरुद्ध निर्णायक हुंकार भरी। सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ‘डबल इंजन’ सरकार ने नक्सलवाद को अंत के कगार पर पहुँचा दिया है। उन्होंने पूरे विश्वास के साथ घोषणा की कि 31 मार्च 2026 से पहले भारत की धरती से नक्सलवाद का नामोनिशान मिटा दिया जाएगा और देश पूरी तरह से इस समस्या से मुक्त होगा।
सुरक्षा समीक्षा बैठक के दौरान श्री शाह ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, पड़ोसी राज्यों के गृह सचिवों और केन्द्रीय सुरक्षा बलों के महानिदेशकों के साथ रणनीति साझा की। उन्होंने कहा कि केन्द्र और छत्तीसगढ़ सरकार की सुरक्षा-केन्द्रित रणनीति, बुनियादी ढांचे के विकास और नक्सल फाइनेंशियल नेटवर्क पर किए गए प्रहार के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिखने लगे हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि माओवादियों के खिलाफ यह लड़ाई अब बिखरी हुई नहीं होनी चाहिए, बल्कि राज्यों और केन्द्रीय एजेंसियों के बीच सटीक समन्वय के साथ अंतिम प्रहार किया जाना चाहिए ताकि शेष बचे नक्सली अन्य राज्यों में शरण न ले सकें।
इसके उपरांत, ‘छत्तीसगढ़ @ 25: शिफ्टिंग द लेंस’ कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने छत्तीसगढ़ की 25 वर्षों की विकास यात्रा का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि कभी ‘बीमारू’ राज्य माना जाने वाला छत्तीसगढ़ आज विकास का पर्याय बन चुका है। पिछले ढाई दशकों में राज्य के बजट में 30 गुना और प्रति व्यक्ति आय में 17 गुना की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने आंकड़ों के माध्यम से बताया कि कैसे राज्य में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 1 से बढ़कर 16 हुई और साक्षरता दर में उल्लेखनीय सुधार आया।
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नक्सली विचारधारा पर कड़ा प्रहार करते हुए श्री शाह ने कहा कि जो लोग माओवाद को ‘विकास की कमी’ से जोड़ते हैं, वे देश को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि यह समस्या केवल कानून-व्यवस्था की नहीं बल्कि एक हिंसक विचारधारा की है जो बंदूक के दम पर समाधान खोजती है, जबकि भारतीय संविधान संवाद और चर्चा की शक्ति में विश्वास रखता है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि यदि बस्तर दशकों तक हिंसा से पीड़ित न होता, तो अपनी अपार खनिज संपदा के कारण यह आज देश का सबसे समृद्ध क्षेत्र होता।
अंत में गृह मंत्री ने हथियार उठाए युवाओं से मुख्यधारा में लौटने की भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी को मारना नहीं है, बल्कि निर्दोषों की रक्षा करना है। जो नक्सली समर्पण करेंगे, उनका स्वागत ‘रेड कारपेट’ बिछाकर किया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले 10 वर्षों में बस्तर न केवल हिंसा से मुक्त होगा, बल्कि देश का सबसे विकसित जनजातीय जिला बनकर उभरेगा।

