पश्चिम एशिया में उपजी परिस्थितियों के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में ईंधन की उपलब्धता को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। खाद्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार मौजूद है और आपूर्ति पूरी तरह सुगम बनी हुई है। सरकार ने आम जनता से किसी भी तरह की अफवाहों में न आने और पैनिक खरीदारी या अनावश्यक संग्रहण से बचने की अपील की है।

खाद्य विभाग के मुताबिक राज्य के सभी जिलों में ईंधन की मांग के अनुसार लगातार सप्लाई की जा रही है। वर्तमान में प्रदेश के 2,516 पेट्रोल-डीजलंपों पर 4.35 करोड़ लीटर पेट्रोल और 8.15 करोड़ लीटर डीजल का स्टॉक सुरक्षित है। राज्य को तेल कंपनियों से प्रतिदिन निर्बाध आपूर्ति मिल रही है और अकेले 21 मई को ही प्रदेश में 32.52 लाख लीटर पेट्रोल और 57.60 लाख लीटर डीजल प्राप्त हुआ है। लखौली, मंदिर हसौद और गोपालपुर स्थित ऑयल कंपनी डिपो से सभी जिलों को उनकी आवश्यकता के अनुसार लगातार ईंधन भेजा जा रहा है। वर्तमान में रबी फसल की कटाई और खरीफ सीजन की तैयारियों के चलते डीजल की मांग बढ़ी है, जिसे देखते हुए शासन ने पहले ही आपूर्ति बढ़ा दी है।

सुरक्षा और सुचारू व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य शासन ने सभी पेट्रोल-डीजल पंपों पर ड्रम, बोतल और जेरीकेन में ईंधन बेचने पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। यदि कोई पंप इस आदेश का उल्लंघन करता है, तो उसे ‘अप्राधिकृत विक्रय’ माना जाएगा और ऐसे मामलों में मोटर स्पिरिट और उच्च वेग डीजल आदेश 2005 के तहत आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के अंतर्गत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि खेती-किसानी के सीजन को देखते हुए इस प्रतिबंध से किसानों को राहत दी गई है। इसके साथ ही जिला कलेक्टर द्वारा चिन्हांकित शासकीय निर्माण कार्यों, अस्पतालों और मोबाइल टावरों जैसी अत्यावश्यक सेवाओं को भी इस दायरे से बाहर रखा गया है, जिन्हें अनुविभागीय अधिकारी के परीक्षण के बाद सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए ईंधन देने की अनुमति होगी।

ईंधन की उपलब्धता की समीक्षा के लिए खाद्य सचिव ने सभी प्रमुख ऑयल कंपनियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की थी, जिसमें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जिन भी पेट्रोल पंपों पर स्टॉक कम हो रहा है या ‘ड्राई आउट’ की स्थिति बन रही है, वहां तुरंत प्राथमिकता के आधार पर ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। सरकार ने साफ किया है कि राज्य में ईंधन की कोई कमी नहीं है और व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं।

लगा दिया है। यदि कोई पंप इस आदेश का उल्लंघन करता है, तो उसे ‘अप्राधिकृत विक्रय’ माना जाएगा और ऐसे मामलों में मोटर स्पिरिट और उच्च वेग डीजल आदेश 2005 के तहत आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के अंतर्गत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि खेती-किसानी के सीजन को देखते हुए इस प्रतिबंध से किसानों को राहत दी गई है। इसके साथ ही जिला कलेक्टर द्वारा चिन्हांकित शासकीय निर्माण कार्यों, अस्पतालों और मोबाइल टावरों जैसी अत्यावश्यक सेवाओं को भी इस दायरे से बाहर रखा गया है, जिन्हें अनुविभागीय अधिकारी के परीक्षण के बाद सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए ईंधन देने की अनुमति होगी।

ईंधन की उपलब्धता की समीक्षा के लिए खाद्य सचिव ने सभी प्रमुख ऑयल कंपनियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की थी, जिसमें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जिन भी पेट्रोल पंपों पर स्टॉक कम हो रहा है या ‘ड्राई आउट’ की स्थिति बन रही है, वहां तुरंत प्राथमिकता के आधार पर ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। सरकार ने साफ किया है कि राज्य में ईंधन की कोई कमी नहीं है और व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं।

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