देश
केंद्र सरकार ने देश में लगातार बढ़ रहे साइबर अपराध और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी पर शिकंजा कसते हुए 30 जून 2026 तक 3,718 मोबाइल ऐप्स को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया है। इन प्रतिबंधित ऐप्स में फर्जी और अवैध लोन देने वाले ऐप्स भी शामिल हैं। गृह मंत्रालय ने लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि समय पर हुई त्वरित कार्रवाई से अब तक 32.80 लाख से अधिक मामलों में 11,158 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि को ठगों के हाथों में जाने से बचाया गया है।
सिम कार्ड और IMEI नंबरों पर भी चला चाबुक
गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने बीजेपी सांसद पीसी मोहन के एक लिखित प्रश्न के उत्तर में यह आंकड़े प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि गृह मंत्रालय के तहत कार्यरत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम, 2000 की धारा 69(A) और 79(3)(b) का उपयोग करते हुए इन ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया है। इसके अतिरिक्त, पुलिस और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर धोखाधड़ी में प्रयुक्त 15.75 लाख से अधिक सिम कार्ड और 5.77 लाख IMEI नंबरों को भी ब्लॉक किया जा चुका है।
रिफंड प्रक्रिया में तेजी और नए मॉड्यूल की शुरुआत
सरकार द्वारा वर्ष 2021 में शुरू किए गए ‘सिटिजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम’ के माध्यम से वित्तीय ठगी की तुरंत रिपोर्टिंग संभव हुई है। हाल ही में अप्रैल माह में लागू किए गए ‘मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल’ और व्यापक एसओपी (SOP) के जरिए बैंकों के साथ समन्वय बनाकर पीड़ितों के पैसे वापस लौटाने की प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाया गया है।
देशव्यापी जागरूकता अभियान और रिपोर्टिंग पोर्टल
इसके साथ ही, साइबर सुरक्षा के प्रति नागरिकों को सतर्क करने के लिए सरकार ‘साइबर दोस्त’ सोशल मीडिया हैंडल, एसएमएस, टीवी-रेडियो और आईपीएल अभियानों के माध्यम से लगातार जागरूकता फैला रही है। नागरिक अपनी शिकायतें नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और अवैध ऑनलाइन कंटेंट की शिकायत हेतु शुरू किए गए ‘सहयोग’ (Sahyog) पोर्टल पर दर्ज करा सकते हैं।
डिजिटल युग में जहाँ तकनीक ने हमारे जीवन को बेहद सुगम बनाया है, वहीं ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराध एक बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। केंद्र सरकार द्वारा 3,718 संदिग्ध ऐप्स को बैन करना, लाखों फर्जी सिम कार्ड ब्लॉक करना और जनता के ₹11,158 करोड़ से अधिक की रकम सुरक्षित बचाना इस बात का प्रमाण है कि सुरक्षा एजेंसियां अब अधिक मुस्तैद और सख्त हैं। ‘मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल’ और I4C जैसी पहल साइबर अपराधों पर नकेल कसने में मील का पत्थर साबित हो रही हैं। हालाँकि, प्रशासनिक और कानूनी कड़ाई के साथ-साथ आम नागरिकों की सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है; क्योंकि जागरूक और सावधान नागरिक ही एक सुरक्षित डिजिटल भारत की सबसे मजबूत नींव हैं।


