बिलासपुर:
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने कर्मचारियों के हित में एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया है कि केवल प्रशासनिक कारणों से किए गए स्थानांतरण के आधार पर किसी भी कर्मचारी की अर्जित वरिष्ठता (Seniority) समाप्त नहीं की जा सकती। अदालत ने वन विभाग के 31 जुलाई 2014 के सर्कुलर की उस शर्त को संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के विपरीत मानते हुए सीमित सीमा तक असंवैधानिक और निरस्त घोषित कर दिया है।
क्या था पूरा मामला और कर्मचारियों का तर्क?
वर्ष 2013 में प्रत्यक्ष भर्ती से नियुक्त वनरक्षकों (Forest Guards) ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनका स्थानांतरण एक वन वृत्त से दूसरे वन वृत्त में केवल प्रशासनिक कारणों से हुआ था। इसके बावजूद भर्ती में प्राप्त उनकी मूल मेरिट को नजरअंदाज कर सर्कुलर के आधार पर उन्हें नई वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे ढकेल दिया गया, जिससे उनके पदोन्नति (Promotion) के अवसर बुरी तरह प्रभावित हुए। शासन ने तर्क दिया कि 2014 के सर्कुलर और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम, 1961 के तहत अंतरवृत्त (Inter-circle) तबादले पर कर्मचारी की वरिष्ठता नए वृत्त में सबसे नीचे तय की जाती है।
हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी और निर्देश
डिवीजन बेंच ने राज्य शासन के तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि प्रशासनिक तबादला सेवा की एक सामान्य प्रक्रिया है। यदि किसी कर्मचारी का चयन प्रत्यक्ष भर्ती से हुआ है और बाद में प्रशासनिक आधार पर उसका तबादला किया जाता है, तो इस स्थानांतरण को दंड का आधार बनाकर उसकी मेरिट समाप्त नहीं की जा सकती।31 जुलाई 2014 के सर्कुलर की संबंधित शर्त और कर्मचारियों के अभ्यावेदन खारिज करने वाले 25 सितंबर 2025 के आदेश को निरस्त कर दिया गया।राज्य शासन को निर्देश दिया गया है कि याचिकाकर्ताओं की वरिष्ठता उनकी मूल भर्ती मेरिट और वैधानिक नियमों के आधार पर 90 दिनों के भीतर पुनः निर्धारित की जाए।

