रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान धान खरीदी की प्रक्रिया और उसमें अपनाई जा रही बायोमेट्रिक व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने सदन में स्पष्ट किया कि प्रदेश के सभी 2740 धान उपार्जन केंद्रों में फिंगरप्रिंट और आइरिस डिवाइस के माध्यम से किसानों का सत्यापन सफलतापूर्वक किया जा रहा है। यह व्यवस्था भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और न्यूनतम थ्रेशोल्ड पैरामीटर्स के अनुरूप संचालित है।
प्रदेश में बायोमेट्रिक आधारित धान खरीदी की शुरुआत खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 से की गई थी, जो वर्तमान सत्र 2025-26 में भी निरंतर जारी है। इस पूरी व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए आवश्यक उपकरणों की खरीदी और उनके वार्षिक रखरखाव पर अब तक कुल 2.86 करोड़ रुपये की राशि व्यय की गई है। इस कुल व्यय में से लगभग 85 प्रतिशत राशि का भुगतान संबंधित कंपनियों को किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, चिप्स (CHiPS) द्वारा खाद्य विभाग और मार्कफेड को आधार प्रमाणीकरण की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं, जिनका तीन वर्षों का सेवा शुल्क वर्तमान में लंबित है।
इस व्यवस्था पर होने वाले वित्तीय भार को लेकर राज्य सरकार ने केंद्र से विशेष अनुरोध किया है। खाद्य मंत्री ने बताया कि धान उपार्जन के दौरान बायोमेट्रिक सत्यापन पर आने वाले खर्च को भारत सरकार की ‘प्राविधिक कॉस्ट शीट’ के प्रशासनिक व्यय मद में शामिल करने की मांग की गई है। यदि केंद्र सरकार इस खर्च को स्वीकार नहीं करती है, तो ऐसी स्थिति में इसका संपूर्ण व्यय भार राज्य शासन को स्वयं वहन करना होगा। फिलहाल, राज्य सरकार ने आश्वस्त किया है कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में धान का उपार्जन पूरी तरह पारदर्शी तरीके से बायोमेट्रिक नियमों का पालन करते हुए किया जा रहा है।



