रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार के नए निर्देशों के अनुसार, आगामी 5 जून 2025 से प्रदेश के विभिन्न विभागों और कार्यालयों में कार्यरत सभी शिक्षकों का संलग्नीकरण (अटैचमेंट) स्वतः समाप्त माना जाएगा।
इस कड़े फैसले के बाद लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने सभी संभागीय संयुक्त संचालकों को पत्र जारी कर तत्काल प्रभाव से रिपोर्ट तलब की है।
डीपीआई द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यह कार्रवाई विधानसभा शून्यकाल 54 की छायाप्रति के आधार पर की जा रही है। इसके साथ ही, स्थानांतरण नीति वर्ष 2025 की कंडिका क्रमांक 3.17 का हवाला देते हुए सभी प्रकार के संलग्नीकरणों को 5 जून से पूरी तरह समाप्त घोषित कर दिया गया है।
संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि विभिन्न विभागों में संलग्न शिक्षकों की विस्तृत और अद्यतन (Updated) जानकारी अनिवार्य रूप से उसी दिन भेजी जाए, ताकि इसे आगे विधानसभा और विभागीय स्तर पर प्रस्तुत किया जा सके। इस कार्य में किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही बरतने पर गंभीर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इस निर्णय के पीछे मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
- शिक्षकों की कमी दूर करना: लंबे समय से मूल पदस्थापना वाले स्कूलों के बजाय अन्य कार्यालयों में जमे शिक्षकों की वापसी से विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर होगी।
- प्रशासनिक पारदर्शिता: संलग्नीकरण की व्यवस्था पर लगातार उठ रहे सवालों को देखते हुए इसे पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जा रहा है।
- मूल विद्यालयों में वापसी: निर्धारित तिथि के बाद सभी संलग्न शिक्षकों को अपने मूल कार्यस्थल (स्कूलो) पर लौटना होगा, जिससे शिक्षा के स्तर में सुधार आने की उम्मीद है।
इस औचक आदेश के बाद प्रदेशभर के संलग्न शिक्षकों के बीच हड़कंप मच गया है। लंबे समय से मलाईदार पदों या सुगम कार्यालयों में जमे शिक्षकों को अब वापस स्कूलों का रुख करना पड़ेगा, जिससे बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिल सकता है।
दूसरी तरफ, इस फैसले को लेकर शिक्षक संगठनों के बीच असमंजस की स्थिति भी बनी हुई है। कुछ संगठनों का कहना है कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के इतने बड़े स्तर पर अचानक संलग्नीकरण समाप्त करने से संबंधित विभागों का कामकाज प्रभावित हो सकता है। संगठन इस निर्णय पर अपनी अगली रणनीति और प्रतिक्रिया देने की तैयारी कर रहे हैं।
हालांकि, प्रशासन अपने रुख पर कायम है और उसका मानना है कि यह निर्णय लंबे समय में राज्य की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को मजबूत और अधिक अनुशासित बनाएगा। डीपीआई ने सभी अधिकारियों को इस पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के कड़े निर्देश दिए हैं।



