रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए धान खरीदी के अंतिम और विस्तृत आंकड़े जारी कर दिए हैं। इस वर्ष राज्य में कुल 1,41,04,366 मीट्रिक टन धान की रिकॉर्ड खरीदी की गई है। इस पूरी प्रक्रिया में प्रदेश के 27,53,007 पंजीकृत किसानों में से 25,24,339 किसानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और अपनी उपज सरकारी केंद्रों पर बेची।
धान खरीदी के मामले में महासमुंद जिला पूरे प्रदेश में शीर्ष पर रहा, जहाँ 10,19,568 मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई। इसके बाद बेमेतरा में 8,64,408 मीट्रिक टन, बलौदाबाजार में 7,91,510 मीट्रिक टन, बालोद में 7,04,163 मीट्रिक टन और बिलासपुर में 6,76,325 मीट्रिक टन धान खरीदा गया। राजधानी रायपुर में भी 6,73,594 मीट्रिक टन की बड़ी खरीदी दर्ज की गई है।
राज्य के अन्य प्रमुख जिलों की बात करें तो सारंगगढ़-बिलाईगढ़ में 6,43,006 मीट्रिक टन, कबीरधाम में 6,05,016 मीट्रिक टन, दुर्ग में 5,85,635 मीट्रिक टन, जांजगीर-चांपा में 5,82,311 मीट्रिक टन और धमतरी में 5,69,963 मीट्रिक टन धान की आवक हुई। इसी क्रम में सक्ती जिले में 5,37,422 मीट्रिक टन, रायगढ़ में 5,35,049 मीट्रिक टन, मुंगेली में 5,34,510 मीट्रिक टन और राजनांदगांव में 5,23,025 मीट्रिक टन की खरीदी की गई।
आंकड़ों के अनुसार, गरियाबंद जिले में 4,37,133 मीट्रिक टन, कांकेर में 4,31,032 मीट्रिक टन, बलरामपुर में 4,20,535 मीट्रिक टन और सूरजपुर में 4,00,772 मीट्रिक टन धान खरीदा गया। मध्य और उत्तर छत्तीसगढ़ के जिलों में सरगुजा ने 3,36,749 मीट्रिक टन, कोंडागांव ने 3,11,732 मीट्रिक टन, खैरागढ़-छुई-गंडई ने 2,68,916 मीट्रिक टन, कोरबा ने 2,27,992 मीट्रिक टन और जशपुर ने 2,24,401 मीट्रिक टन का योगदान दिया।
बस्तर संभाग और अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में बस्तर जिले में 2,13,873 मीट्रिक टन, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 1,84,653 मीट्रिक टन, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में 1,24,008 मीट्रिक टन और कोरिया में 98,719 मीट्रिक टन की खरीदी हुई। छोटे जिलों और कम उत्पादन वाले क्षेत्रों में मनेंद्रगढ़-चिमिरी-भरतपुर में 74,131 मीट्रिक टन, बीजापुर में 73,166 मीट्रिक टन, सुकमा में 55,689 मीट्रिक टन, नारायणपुर में 28,688 मीट्रिक टन और दंतेवाड़ा में सबसे कम 21,795 मीट्रिक टन धान की खरीदी दर्ज की गई है।
यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों के कारण प्रदेश के मैदानी इलाकों से लेकर वनांचल तक के किसानों ने भारी संख्या में धान की बिक्री की है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है।



