रायपुर: छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने प्रदेश के शासकीय सेवकों के हितों को ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी को दो अलग-अलग महत्वपूर्ण स्मरण पत्र सौंपे हैं। फेडरेशन ने राज्य सरकार से अपने घोषणा पत्र के वादों को पूरा करते हुए चार-स्तरीय समयमान वेतनमान और मध्य प्रदेश की तर्ज पर 300 दिवस अर्जित अवकाश नगदीकरण का लाभ शीघ्र प्रदान करने की मांग की है।
फेडरेसन की प्रमुख मांगें
1. चार-स्तरीय समयमान वेतनमान लागू करने बाबत:
वर्तमान में शासकीय सेवकों को 30 वर्ष की सेवा अवधि पूर्ण होने पर तृतीय समयमान का प्रावधान है। फेडरेशन का तर्क है कि राज्य में समय पर पदोन्नति न मिलने और सीमित अवसरों के कारण कर्मचारियों को न्यायसंगत लाभ नहीं मिल पा रहा है।
कर्मचारियों को 8 वर्ष, 16 वर्ष, 24 वर्ष एवं 30 वर्ष की सेवा पूर्ण होने पर चार-स्तरीय समयमान वेतनमान लागू किया जाए।फेडरेशन ने याद दिलाया कि वर्तमान सरकार ने अपने निर्वाचन के पूर्व जारी घोषणा-पत्र में चार-स्तरीय समयमान वेतनमान लागू करने का वादा किया था, जिसे अब अमलीजामा पहनाने की जरूरत है।
2. 300 दिवस अर्जित अवकाश नगदीकरण का लाभ (मध्य प्रदेश की तर्ज पर):
शासकीय सेवकों को सेवानिवृत्ति अथवा सेवाकाल में मृत्यु की स्थिति में अर्जित अवकाश के नगदीकरण की अधिकतम सीमा को वर्तमान 240 दिनों से बढ़ाकर 300 दिन किया जाए। फेडरेशन के अनुसार, इस मांग को लेकर पिछले 25 वर्षों से संघर्ष जारी है और मध्य प्रदेश की तरह निर्णय न होने के कारण प्रदेश के कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।
छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन (प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा) ने पत्र के माध्यम से शासन से उम्मीद जताई है कि वित्त विभाग इस पर तत्परतापूर्वक पहल करेगा। फेडरेशन ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इन वादों और मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो यह निर्वाचित सरकार के घोषणा-पत्र को प्रभावित करेगा और कर्मचारियों की सोच पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।



