सोलहवें वित्त आयोग का अनुदान और आवंटन
सोलहवें वित्त आयोग ने निर्धारित अवधि के लिए देश के सभी राज्यों की पंचायती राज संस्थाओं के लिए अनुदान की सिफारिश की है। इस कुल आवंटन में से छत्तीसगढ़ राज्य के ग्रामीण स्थानीय निकायों को भी राशि प्राप्त होगी। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा जारी परिचालन दिशानिर्देशों के तहत इस अनुदान को बेसिक ग्रांट और परफॉर्मेंस ग्रांट में विभाजित किया गया है।
अनुदान का विभाजन और उसका उपयोग
अनुदान की राशि को उपयोग के आधार पर दो भागों में बांटा गया है। इसमें बेसिक ग्रांट का एक हिस्सा ‘टाइड ग्रांट’ के रूप में रहेगा, जिसका उपयोग केवल स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और जल प्रबंधन के कार्यों के लिए किया जा सकता है। वहीं, शेष बेसिक ग्रांट और संपूर्ण परफॉर्मेंस ग्रांट को ‘अनटाइड ग्रांट’ रखा गया है, जिसे पंचायतें संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में शामिल विषयों के तहत अपनी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार खर्च कर सकती हैं।
पंचायतों को आत्मनिर्भर (OSR) बनाने की पहल
पंचायती राज मंत्रालय ने ग्राम पंचायतों के ‘स्वयं के राजस्व स्रोत’ को मजबूत कर उन्हें वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसके तहत प्रबंध संस्थानों के सहयोग से तैयार प्रशिक्षण मॉड्यूल के जरिए जन प्रतिनिधियों और अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया है। साथ ही, बेहतर प्रदर्शन के लिए ‘आत्मनिर्भर पंचायत विशेष पुरस्कार’, कर प्रबंधन के लिए ‘समर्थ पंचायत पोर्टल’, राज्यों के लिए ‘मॉडल नियम’ और संपत्ति कर के आधार को मजबूत करने हेतु ‘स्वामित्व योजना’ लागू की गई है।
वित्तीय पारदर्शिता और डिजिटल निगरानी
केंद्रीय अनुदान के पारदर्शी उपयोग और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय ने दो प्रमुख डिजिटल प्रणालियां लागू की हैं। पहला, ‘ई-ग्रामस्वराज पोर्टल’, जो योजना निर्माण से लेकर भुगतान तक की सभी वित्तीय प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाता है और रियल-टाइम डिजिटल भुगतान की सुविधा देता है। दूसरा, ‘ऑडिट-ऑनलाइन’ एप्लिकेशन, जिसके माध्यम से पंचायत खातों का ऑनलाइन लेखा परीक्षण कर वित्तीय पर्यवेक्षण को मजबूत किया जा रहा है।


