*CG New.in उमेश कुमार प्रजापति* सरगुजा जिले के सीतापुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बतौली विकासखंड में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ग्राम पंचायत महेशपुर–बटाईकेला के बीच स्थित पुलिया की मरम्मत के कुछ ही दिनों बाद उसका मरम्मत किया गया एक हिस्सा टूट जाने से विभागीय कार्यप्रणाली और निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
*घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं* जिससे क्षेत्र में लोगों में भारी नाराजगी जताई जा रही है। वहीं स्थानीय लोगों का आरोप है पहले से क्षतिग्रस्त पुलिया की पूर्ण मरम्मत कराने के बजाय केवल आधे हिस्से की मरम्मत कर खानापूर्ति की गई है। और उनका कहना है मरम्मत के कुछ समय बाद ही ओवरलोड वाहन के गुजरने से नया निर्मित हिस्सा टूट गया, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
*ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से घटिया सामग्री का उपयोग कर निर्माण कराया गया है।* और उनका कहना है शासन प्रशासन का पैसा को लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद भी निर्माण टिकाऊ साबित नहीं हुआ और कुछ ही दिनों में पुलिया की ढलाई उखड़ने लगी। कई ग्रामीणों ने दावा किया कि ढलाई में सीमेंट की मात्रा बेहद कम दिखाई दे रही है तथा अधिकतर कार्य बालू और गिट्टी के सहारे निर्माण किया गया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
मामले को और गंभीर तब माना जा रहा है जब पुलिया के पास लगे *सूचना बोर्ड पर अब भी “पुल निर्माण/कार्य प्रगति पर है* लिखा हुआ है, जबकि स्थानीय लोगों के अनुसार मरम्मत का कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है। इससे कार्य की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
जिससे मामले में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के एक अधिकारी से संपर्क किए जाने पर उन्होंने कथित रूप से कहा,आपको छापना है तो छाप दीजिए,मैं ऊपर से लेकर नीचे तक कमीशन देता हूं।” इस कथित बयान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। यदि यह बयान सही पाया जाता है, तो यह विभागीय कार्यप्रणाली और सरकारी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। ऐसे मामले में निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच आवश्यक मानी जा रही है।
*सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो* के बाद क्षेत्रवासियों में भारी आक्रोश बढ़ गया है। लोगों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने, निर्माण कार्य की तकनीकी गुणवत्ता की जांच करवाने तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, ठेकेदारों और अन्य जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
*अब सबसे बड़ा सवाल* यह है कि क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह केवल फाइलों तक सीमित रह जाएगा। या क्षेत्रवासियों की निगाहें अब शासन और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।


