बिलासपुर: गरीबों को मुफ्त इलाज की गारंटी देने वाली केंद्र सरकार की ‘आयुष्मान भारत योजना’ जिले के चुनिंदा निजी अस्पतालों के लिए मुनाफाखोरी का जरिया बन गई है। जिले के 65 अनुबंधित निजी अस्पतालों में से 10 से 12 बड़े अस्पताल नियमों को ताक पर रखकर दोहरी वसूली का खेल चला रहे हैं। मरीजों से जांच के नाम पर सीधे 10 से 15 हजार रुपये नकद ऐंठे जा रहे हैं और बाद में सरकारी खाते (आयुष्मान पैकेज) से भी पूरी रकम काटी जा रही है।
जांच के नाम पर वसूली, रिपोर्ट साथ लाने पर भी मनमानी
योजना के नियमों के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों में इलाज पूरी तरह कैशलेस और निश्शुल्क है। इसके बावजूद निजी अस्पताल पुरानी मेडिकल रिपोर्ट मानने से इनकार कर दोबारा पैथोलॉजी व रेडियोलॉजी जांच के नाम पर नकद पैसे की मांग करते हैं। पैसे न देने पर मरीजों को इलाज से वंचित कर दिया जाता है।
केस 1: पथरी का इलाज कराने पहुंचे मरीज से मांगे 15 हजार
मंगला निवासी एक मरीज 17 एमएम पथरी की पूरी जांच रिपोर्ट लेकर शहर के नामी अस्पताल पहुंचे। आयुष्मान कार्ड दिखाने के बावजूद प्रबंधन ने कहा कि नई जांच करानी होगी और इसके लिए 15 हजार रुपये नकद जमा करने होंगे। पैसे न होने के कारण मरीज को बिना इलाज लौटना पड़ा।
केस 2: पैर की टूटी हड्डी, मजबूरी में चुकाए 10 हजार
बोदरी निवासी पंकज साहू को पैर की हड्डी टूटने पर एक प्रतिष्ठित आर्थोपेडिक अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल प्रबंधन ने शर्त रख दी कि प्राथमिक जांच के 10 हजार रुपये नकद देने के बाद ही आयुष्मान से आगे का इलाज शुरू होगा। गंभीर स्थिति को देखते हुए परिजनों को मजबूरन रकम चुकानी पड़ी।
मरीजों के अधिकार और बचाव के तरीके
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शून्य सहभागिता नियम: आयुष्मान योजना में रजिस्ट्रेशन, दवा या जांच के नाम पर एक भी रुपया लेना प्रतिबंधित है।
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पक्की रसीद मांगें: यदि अस्पताल किसी भी मद में नकद राशि मांगता है, तो उसकी पक्की रसीद अनिवार्य रूप से लें।
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मैसेज पर नजर रखें: डिस्चार्ज के समय रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर पोर्टल से आए एसएमएस में दर्ज काटी गई राशि का मिलान करें।
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शिकायत दर्ज कराएं: अस्पताल में मौजूद ‘आयुष्मान मित्र’, टोल-फ्री नंबर 14555 या सीधे सीएमएचओ कार्यालय में लिखित शिकायत करें।
“आयुष्मान भारत योजना में मरीजों से नकद वसूली और पैकेज से राशि काटने की शिकायतें मिली हैं। जांच के घेरे में आए 10-12 अस्पतालों के खिलाफ साक्ष्य मिलने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।”— डॉ. शुभा गरेवाल, सीएमएचओ



