जशपुर
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में स्थित तपकरा गांव को पूरे देश में धरती के ‘नागलोक’ के नाम से जाना जाता है। प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों और पहाड़ों से घिरा यह क्षेत्र न सिर्फ अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण खास है, बल्कि यहां रहने वाले अनगिनत जहरीले सांप इसे पूरे देश में एक अलग पहचान दिलाते हैं।
तीन राज्यों की सीमा और अनुकूल वातावरण
तपकरा गांव की भौगोलिक बनावट बेहद अनोखी है। यह इलाका छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा—इन तीन राज्यों के त्रिकोण (बॉर्डर) पर स्थित है। चारों ओर फैले घने जंगल और नम, ठंडा मौसम सांपों के प्रजनन और उनके रहने के लिए सबसे आदर्श वातावरण तैयार करते हैं। यही वजह है कि यहां भारी तादाद में अलग-अलग प्रजातियों के सर्प सुरक्षित रहकर अपनी वंशवृद्धि करते हैं।
40 से ज्यादा प्रजातियां और घातक जहर
वन विभाग और सर्पमित्रों के अनुसार, तपकरा और उसके नजदीकी जंगली इलाकों में लगभग 40 से अधिक प्रजातियों के सांप पाए जाते हैं। इनमें सबसे खतरनाक और जानलेवा प्रजातियां शामिल हैं:
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कोबरा (नाग): अत्यधिक न्यूरोटॉक्सिक जहर वाला यह सांप बेहद आक्रामक माना जाता है।
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कॉमन करैत: इसका दंश अक्सर सोते समय लगता है और इसका जहर बेहद घातक होता है।
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अहिराज (बैंडेड करैत): पीली और काली पट्टियों वाला यह सांप रात में सक्रिय रहता है।
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बंबू पिट वाइपर: पेड़ों और झाड़ियों में छिपकर रहने वाला वाइपर, जिसका हीमोटॉक्सिक जहर इंसानों के लिए जानलेवा साबित होता है।
कोतेबीरा धाम की रहस्यमयी गुफा
जशपुर जिले के कोतेबीरा धाम में स्थित एक गुफा को लेकर कई रहस्य और मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। स्थानीय लोग इसे नागलोक का मुख्य प्रवेश द्वार मानते हैं।
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धार्मिक मान्यता: पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन समय में इस स्थान पर देवी-देवता वास करते थे। बाद में वे इसी गुफा के रास्ते नागलोक चले गए।
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रक्षक नाग: मान्यता है कि तब से लेकर आज तक जहरीले नाग उस गुफा और पवित्र स्थान की रक्षा कर रहे हैं।
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अंदर जाने की मनाही: गुफा के भीतर भारी संख्या में विषैले सांपों का डेरा होने के कारण कोई भी इंसान इसके भीतर कदम रखने की हिम्मत नहीं करता। लोग बाहर से ही दर्शन कर लौट जाते हैं।
प्रशासन की सतर्कता और जन-जागरूकता
सांपों की भारी संख्या और सर्पदंश के बढ़ते खतरों को देखते हुए वन विभाग की टीम लगातार ग्रामीणों के बीच अभियान चलाती है। स्थानीय लोगों को जागरूक किया जाता है कि सर्पदंश होने पर झाड़-फूंक के चक्कर में समय बर्बाद न करें, बल्कि तुरंत प्राथमिक उपचार अपनाकर नजदीकी अस्पताल जाएं।
तपकरा आज रहस्य, खतरे और अटूट लोक-आस्था का ऐसा संगम बन चुका है, जहां इंसान और नागों का सदियों पुराना सह-अस्तित्व देखने को मिलता है।

