रायपुर।
सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष *रविंद्र राठौर* ने शिक्षा विभाग द्वारा VSK (विद्या समीक्षा केंद्र) ऐप के माध्यम से ऑनलाइन अटेंडेंस को लेकर शिक्षकों को दी जा रही चेतावनियों पर गहरी आपत्ति व्यक्त की है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से आग्रह किया है कि शिक्षक राष्ट्र निर्माता हैं, उनके साथ सम्मानजनक एवं संवेदनशील व्यवहार किया जाए। यदि किसी भी शिक्षक के वेतन में अनुचित कटौती की जाती है, तो फेडरेशन प्रदेशव्यापी लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा।
प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राठौर ने जारी बयान में कहा, “अभी नए शैक्षणिक सत्र को शुरू हुए दो दिन भी नहीं बीते हैं और विभाग ने एकतरफा एवं अव्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाते हुए वेतन कटौती संबंधी आदेश जारी कर दिए हैं। अधिकारी यह अच्छी तरह समझ लें कि शिक्षक ऑनलाइन अटेंडेंस का विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि VSK ऐप में मौजूद तकनीकी चुनौतियों एवं खामियों की ओर ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। पर्याप्त तैयारी एवं परीक्षण के बिना इसे लागू किया गया है, जिसके कारण यह धरातल पर अपेक्षित परिणाम देने में सफल नहीं हो रहा है।”
उन्होंने अधिकारियों को जमीनी हकीकत से रूबरू होने की नसीहत देते हुए कहा कि कार्यालयों में बैठकर आदेश जारी करना आसान है। अधिकारी सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में जाकर देखें कि वहां नेटवर्क की क्या स्थिति है और ऐप के उपयोग में शिक्षकों को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यदि विभाग को ऑनलाइन अटेंडेंस की इतनी ही चिंता है, तो वह प्रत्येक स्कूल में आधिकारिक डिवाइस एवं इंटरनेट सुविधा की व्यवस्था सुनिश्चित करे।
फेडरेशन ने स्पष्ट किया कि मोबाइल शिक्षकों की निजी संपत्ति है, जिसका उपयोग वे पूरी ईमानदारी और स्वेच्छा से विभागीय कार्यों के लिए कर रहे हैं। इसके बावजूद यदि शिक्षकों की भावनाओं एवं गरिमा की उपेक्षा की गई तथा वेतन कटौती की चेतावनियां जारी रहीं, तो शिक्षक अपने निजी मोबाइल का उपयोग बंद करने पर विचार करने के लिए विवश होंगे। ऐसी स्थिति में विभाग को स्वयं यह तय करना होगा कि वह राज्य के शिक्षकों को आवश्यक संसाधन किस प्रकार उपलब्ध कराएगा।
रविंद्र राठौर ने कहा कि यदि विभागीय अधिकारियों द्वारा संवाद एवं समाधान आधारित दृष्टिकोण नहीं अपनाया गया और “यदि किसी भी शिक्षक के वेतन में अनुचित कटौती की जाती है, तो फेडरेशन प्रदेशव्यापी लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा।” पूरे प्रदेश में *’मोबाइल छोड़ो, चाक उठाओ*’ अभियान चलाएगा। शिक्षकों के आत्मसम्मान पर किसी भी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा और उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों की जिम्मेदारी विभागीय प्रशासन की होगी।


