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नई दिल्ली: भारत ने वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने और 2070 तक ‘नेट जीरो’ (शून्य उत्सर्जन) का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में एक बड़ी वैज्ञानिक छलांग लगाई है। नीति आयोग ने ‘विकसित भारत और नेट जीरो’ के संबंध में 11 महत्वपूर्ण अध्ययन रिपोर्टों की श्रृंखला शुरू की है, जिसका पहला सेट नई दिल्ली में जारी किया गया। ये रिपोर्टें न केवल एक सरकारी दस्तावेज हैं, बल्कि उस रोडमैप का हिस्सा हैं जो भारत की आर्थिक वृद्धि और जलवायु सुरक्षा के बीच संतुलन साधने का काम करेंगी।

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विकास और पर्यावरण: एक साथ संभव है दोनों लक्ष्य

नीति आयोग के इस व्यापक अध्ययन से यह साफ हो गया है कि भारत अपनी आर्थिक रफ्तार को कम किए बिना जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा कर सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, 2047 का भारत कैसा होगा, इसका 85% हिस्सा अभी निर्मित होना बाकी है। यह भारत के लिए एक सुनहरा अवसर है कि वह अपनी नई बुनियादी सुविधाओं, शहरों और उद्योगों को शुरू से ही जलवायु के अनुकूल और ‘ग्रीन’ बना सके। नीति आयोग के सीईओ श्री बी.वी.आर. सुब्रमण्यम के अनुसार, नेट जीरो की रणनीति चार सरल स्तंभों पर टिकी है—ऊर्जा का विद्युतीकरण, बिजली का हरितकरण (Green Power), मिशन लाइफ के जरिए मांग पर नियंत्रण और संसाधनों का दोबारा उपयोग।

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ऊर्जा और कोयला: एक व्यावहारिक दृष्टिकोण

रिपोर्ट में एक बेहद व्यावहारिक और चुनौतीपूर्ण तथ्य भी सामने रखा गया है। भारत की कोयला खपत 2047 तक बढ़ती रहेगी, क्योंकि ऊर्जा की तीव्रता को कम करने और दक्षता बढ़ाने के बावजूद, विकसित राष्ट्र बनने की दौड़ में ऊर्जा की मांग चरम पर होगी। इसके बावजूद, स्वच्छ तकनीकों और नवीकरणीय ऊर्जा में तेजी से निवेश करके भारत नेट जीरो के लक्ष्यों की दिशा में अपनी प्रगति जारी रख सकता है।

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निवेश की विशाल चुनौती: 22 ट्रिलियन डॉलर की आवश्यकता

विकसित भारत के इस सपने को साकार करने के लिए पूंजी का एक बड़ा हिस्सा जुटाना होगा। अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2070 तक कुल 22.7 ट्रिलियन डॉलर के असाधारण निवेश की आवश्यकता होगी। इसमें से लगभग 6 ट्रिलियन डॉलर बाहरी स्रोतों (वैश्विक पूंजी) से आने की उम्मीद है। वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन ने जोर दिया कि यह अध्ययन भविष्य की आर्थिक चर्चाओं के लिए एक मानक (Standard) का काम करेगा, जिसमें घरेलू वित्तीय सुधारों और वैश्विक एकीकरण की जरूरत को रेखांकित किया गया है।

ग्लोबल साउथ के लिए पथ-प्रदर्शक

नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री सुमन बेरी ने विश्वास जताया कि भारत का यह मॉडल दुनिया के अन्य विकासशील देशों (ग्लोबल साउथ) के लिए एक प्रेरणा बनेगा। भारत यह साबित करने जा रहा है कि एक विशाल आबादी वाला देश कैसे अपनी विकास प्राथमिकताओं और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को एक साथ निभा सकता है। रिपोर्ट में यह भी चर्चा की गई है कि भारत कैसे साफ-सुथरी तकनीकों की दिशा में वैश्विक लीडर बन सकता है, जिससे न केवल रोजगार पैदा होंगे बल्कि जीडीपी वृद्धि को भी नया आयाम मिलेगा।

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‘विकसित भारत @ 2047’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक और आर्थिक संभावना है। नीति आयोग की ये रिपोर्टें नीति निर्धारकों और शोधकर्ताओं के लिए एक ‘ब्लूप्रिंट’ की तरह काम करेंगी। यदि भारत सही समय पर तकनीक, व्यवहार परिवर्तन और आवश्यक वित्त जुटाने में सफल रहता है, तो वह दुनिया के सामने एक ऐसा विकास मॉडल पेश करेगा जो समृद्ध भी होगा और स्वच्छ भी।

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