देश में 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई (UPI) लेनदेन पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के ऊपर 18 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर (GST) लगाने की तैयारी की जा रही है। केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता वाली जीएसटी परिषद की आगामी 7 अक्टूबर को प्रस्तावित बैठक में इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह टैक्स सीधे उपभोक्ता पर नहीं, बल्कि कारोबारियों द्वारा भुगतान की जाने वाली सेवा शुल्क (MDR) पर लगाने पर विचार चल रहा है।
सरकार ने 15 अक्टूबर से कारोबारियों (मर्चेंट्स) को प्राप्त होने वाले 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई पेमेंट्स पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू करने की घोषणा की है, जबकि 75,000 रुपये या उससे अधिक के बड़े लेनदेन पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये तय किया गया है। आम उपभोक्ताओं को राहत देते हुए व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) लेनदेन और 2,000 रुपये तक के छोटे भुगतानों को इस दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है।
चूंकि डिजिटल भुगतान के प्रसंस्करण और निपटान (Settlement) के लिए यह शुल्क कारोबारी भुगतान नेटवर्क को देंगे, इसलिए जीएसटी कानून के तहत इसे ‘सेवा’ मानकर 18 प्रतिशत जीएसटी के दायरे में लाने पर चर्चा होगी। हालांकि, कारोबारियों के लिए राहत की बात यह रहेगी कि वे एमडीआर पर चुकाए गए जीएसटी का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम कर सकेंगे, जिससे उन पर अतिरिक्त कर का शुद्ध वित्तीय बोझ कम हो जाएगा। 7 अक्टूबर की बैठक में परिषद का मुख्य जोर डिजिटल प्रक्रियाओं के सरलीकरण और सुगम संचालन पर रहने की उम्मीद है।

