भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना को समर्पित ‘हरतालिका तीज’ का पावन पर्व हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह पर्व माता पार्वती की कठिन तपस्या और शिव-पार्वती के पुनर्मिलन का पावन प्रतीक है। सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य के लिए यह कठिन निर्जला व्रत रखती हैं, वहीं कुंवारी कन्याएं सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक पूजन करती हैं।
हरतालिका तीज 2026: शुभ तिथि व मुहूर्त
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तृतीया तिथि आरंभ: 13 सितंबर 2026, सुबह 07:08 बजे
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तृतीया तिथि समाप्त: 14 सितंबर 2026, सुबह 07:06 बजे
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उदयातिथि अनुसार पर्व तिथि: सोमवार, 14 सितंबर 2026
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प्रातःकाल पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त: सुबह 06:12 बजे से 07:06 बजे तक
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प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: शाम 06:27 बजे के बाद
हरतालिका तीज पूजन विधि
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संकल्प व तैयारी: प्रात:काल स्नान के बाद लाल या हरे रंग के शुभ वस्त्र धारण करें और हाथ में जल लेकर शिव-पार्वती का ध्यान करते हुए निर्जला व्रत का संकल्प लें।
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प्रतिमा निर्माण: शुद्ध बालू, रेत या काली मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और प्रथम पूज्य श्री गणेश की प्रतिमाएं स्वयं बनाएं।
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चौकी स्थापना: एक लकड़ी की चौकी पर लाल या हरा वस्त्र बिछाकर प्रतिमाओं को स्थापित करें और विधिपूर्वक कलश स्थापित करें।
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शिव पूजन: भगवान भोलेनाथ को बेलपत्र, धतूरा, आक के पुष्प, भस्म, चंदन, जनेऊ और श्वेत वस्त्र अर्पित करें।
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मां गौरी का श्रृंगार: माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री (सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, चूड़ियां, महावर) और लाल चुनरी चढ़ाएं।
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भोग व आरती: भगवान को ताजे फल, मिष्ठान्न और नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद धूप-दीप जलाकर हरतालिका तीज की पावन व्रत कथा पढ़ें या सुनें और विधिवत आरती करें।
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रात्रि जागरण व पारण: मान्यतानुसार हरतालिका तीज की रात्रि में भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। अगले दिन सुबह पुनः सामान्य पूजा और आरती के बाद ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान-दक्षिणा देकर ही व्रत का पारण करें।


