रेलवे द्वारा की गई यह तैयारी पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक व्यापक है। उदाहरण के तौर पर, साल 2025 में होली के दौरान कुल 1,144 विशेष फेरे लगाए गए थे, लेकिन इस बार रेलवे ने अपनी क्षमता में बड़ी बढ़ोतरी की है। इन विशेष ट्रेनों का मुख्य उद्देश्य प्रमुख शहरों और राज्यों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना और यात्रा को आरामदायक व परेशानी मुक्त बनाना है। इन सेवाओं का लाभ यात्रियों को मुख्य रूप से मार्च के पूरे महीने के दौरान मिलेगा।
विभिन्न रेलवे जोनों की भागीदारी की बात करें तो, इस बार पूर्व मध्य रेलवे (ECR) सबसे आगे है, जो सर्वाधिक 285 विशेष ट्रेनों का संचालन करेगा। इसके साथ ही पश्चिमी मार्गों पर यात्रियों के दबाव को कम करने के लिए पश्चिम रेलवे द्वारा 231 ट्रेनें और मध्य रेलवे द्वारा 209 ट्रेनें पटरी पर उतारी जाएंगी। दक्षिण भारत से आने-जाने वाले यात्रियों के लिए दक्षिण मध्य रेलवे ने 160 और दक्षिण पश्चिम रेलवे ने 47 सेवाओं की योजना बनाई है। वहीं उत्तर भारत में सुगम यात्रा के लिए उत्तर रेलवे 108 और उत्तर पश्चिम रेलवे 71 ट्रेनों का परिचालन करेगा।
भविष्य का ‘ब्लू गोल्ड’ रिजर्व: “मरुस्थल होते राज्यों के बीच ‘वॉटर सरप्लस’ छत्तीसगढ़
देश के अन्य हिस्सों को जोड़ने के लिए उत्तर मध्य रेलवे द्वारा 66, जबकि पूर्वोत्तर रेलवे और पूर्व तटीय रेलवे द्वारा 62-62 विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी। इसके अलावा पश्चिम मध्य रेलवे 43, दक्षिण रेलवे 39 और दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे 15 सेवाओं के साथ इस अभियान में योगदान देंगे। क्षेत्रीय स्तर पर छोटी मांगों को पूरा करने के लिए कोंकण रेलवे और पूर्वोत्तर सीमा रेलवे भी अपनी विशेष सेवाएं प्रदान करेंगे। भारतीय रेलवे ने स्पष्ट किया है कि त्योहारों के इस मौसम में वह न केवल यात्रियों की सुविधा, बल्कि सुरक्षा और समयबद्ध परिचालन के लिए भी पूरी तरह संकल्पित है।

