नई दिल्ली: देश में महिलाओं को सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा) कैंसर से बचाने की दिशा में भारत ने एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया है। केंद्र सरकार द्वारा फरवरी 2026 में शुरू किए गए ‘राष्ट्रीय एचपीवी टीकाकरण अभियान’ के तहत अब तक ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) वैक्सीन की 80 लाख से ज्यादा खुराकें दी जा चुकी हैं। यह अभियान 14 वर्ष की किशोरियों को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर माता-पिता की सहमति से पूरी तरह निःशुल्क और स्वैच्छिक एकल खुराक (Single Dose) के रूप में उपलब्ध कराया जा रहा है।
गुजरात, यूपी और एमपी समेत कई राज्यों में शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल
अभियान के क्रियान्वयन में राज्यों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है:
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100% कवरेज वाले राज्य: उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश और मिजोरम ने अपने लक्षित समूहों का शत-प्रतिशत टीकाकरण पूरा कर लिया है।
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यूपी रहा शीर्ष पर: सबसे ज्यादा टीकाकरण उत्तर प्रदेश में दर्ज हुआ, जहां 22 लाख से अधिक किशोरियों को टीका लगाया गया।
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अन्य अग्रणी राज्य: बिहार, आंध्र प्रदेश और असम में कवरेज 90 फीसदी के पार पहुंच चुका है, जबकि कर्नाटक ने 85 फीसदी से ज्यादा का आंकड़ा हासिल किया है।
डिजिटल ट्रैकिंग और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
टीकाकरण कार्यक्रम को पारदर्शी और सुचारू बनाने के लिए भारत के डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म ‘यू-विन’ (U-WIN) का उपयोग किया जा रहा है, जिससे प्रत्येक लाभार्थी की रियल-टाइम निगरानी हो रही है। सभी टीकाकरण सत्र सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में प्रशिक्षित डॉक्टरों की देखरेख में आयोजित किए जा रहे हैं। टीकाकरण के बाद किसी भी तरह की दुर्लभ प्रतिकूल घटना (AEFI) के त्वरित प्रबंधन के लिए 24 घंटे स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध रखी गई हैं।
विश्व स्तर पर अब तक एचपीवी वैक्सीन की 80 करोड़ से ज्यादा खुराकें दी जा चुकी हैं, जो इसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता को प्रमाणित करती हैं। भारत में हर साल 14 वर्ष की लगभग 1.2 करोड़ लड़कियां इस आयु वर्ग में आती हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय अब बचे हुए लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ी को कैंसर से पूरी सुरक्षा मिल सके।

