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पश्चिम एशिया में शांति की आहट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ दो हफ्ते के सीजफायर का बड़ा एलान किया है।
इस समझौते के तहत ईरान पर होने वाले संभावित हमलों और बमबारी को फिलहाल रोक दिया गया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि यह सीजफायर दोनों तरफ से लागू होगा, जिसका अर्थ है कि इस अवधि के दौरान न तो अमेरिका हमला करेगा और न ही ईरान कोई आक्रामक कदम उठाएगा।
हालांकि, इस शांति की दिशा में अमेरिका ने एक बड़ी शर्त रखी है कि ईरान को तुरंत और पूरी तरह से होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित आवाजाही के लिए खोलना होगा। राष्ट्रपति के अनुसार अमेरिका पहले ही अपने कई सैन्य लक्ष्य हासिल कर चुका है और अब दोनों देश एक दीर्घकालिक शांति समझौते की दिशा में काम कर रहे हैं।
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दूसरी ओर ईरान ने भी इस दो हफ्ते के युद्धविराम पर अपनी मुहर लगा दी है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने इस समझौते की पुष्टि करते हुए इसे अपनी बड़ी जीत बताया है। यह समझौता पाकिस्तान की मध्यस्थता से संभव हुआ है और इसे ईरान के नए सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह मोजतबा खामेनेई की मंजूरी मिली है। ईरान ने अपनी सहमति के साथ कुछ प्रमुख मांगें भी रखी हैं, जिनमें हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी सेना का समन्वय, क्षेत्र से अमेरिकी सेना की वापसी, आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना और युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई शामिल है। दोनों देशों के बीच अब स्थायी शांति के लिए अगली महत्वपूर्ण बातचीत 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में होने की संभावना है।
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इस संघर्ष की पृष्ठभूमि काफी तनावपूर्ण रही है, जिसकी शुरुआत 28 फरवरी को ईरान पर हुए हमलों और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के साथ हुई थी। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों और इस्राइल पर मिसाइलें दागी थीं। अब ट्रंप के इस एलान और ईरान की सहमति के बाद वैश्विक बाजारों में राहत देखी जा रही है, जिससे तेल की कीमतों में गिरावट आई है। हालांकि, शांति की यह कोशिश कितनी टिकाऊ होगी, यह आने वाले दो हफ्तों में होने वाली बातचीत और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर निर्भर करेगा। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस्लामाबाद में होने वाली इस रणनीतिक चर्चा पर टिकी हैं।
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