ईरान से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। ईरानी सरकारी मीडिया ने आधिकारिक तौर पर यह पुष्टि कर दी है कि देश के सर्वोच्च नेता आयातुल्ला अली खामेनेई की एक भीषण सैन्य हमले में मृत्यु हो गई है। यह हमला अमेरिका और इस्राइल द्वारा संयुक्त रूप से अंजाम दिया गया, जिसने पूरे मध्य पूर्व की राजनीति और सुरक्षा समीकरणों को हिलाकर रख दिया है।
ईरानी समाचार एजेंसी IRNA और सरकारी टेलीविजन के अनुसार, यह हमला तेहरान स्थित खामेनेई के सुरक्षित परिसर को निशाना बनाकर किया गया था। इस सटीक सैन्य अभियान में न केवल सर्वोच्च नेता, बल्कि उनके परिवार के कई सदस्य और ईरान के शीर्ष सैन्य अधिकारी भी मारे गए हैं। घटना के तुरंत बाद ईरान की सर्वोच्च सुरक्षा परिषद ने आपातकालीन बैठक बुलाई और देश भर में 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा कर दी। सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल सात दिनों के पूर्ण सार्वजनिक अवकाश का भी ऐलान किया है।
इस घटना पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए खामेनेई को इतिहास के सबसे क्रूर और बुरे तानाशाहों में से एक बताया। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई वैश्विक सुरक्षा और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए आवश्यक थी। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि यदि ईरान ने जवाबी कार्रवाई की, तो उसे और भी गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
खामेनेई की मौत के बाद ईरान के भीतर और बाहर भारी तनाव व्याप्त है। तेहरान की सड़कों पर सुरक्षा बल तैनात हैं और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इस हमले का प्रतिशोध लेने की चेतावनी दी है। दूसरी ओर, खाड़ी देशों और तेल अवीव में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है क्योंकि ईरान समर्थित गुटों द्वारा बड़े पैमाने पर जवाबी हमलों की आशंका जताई जा रही है। 1989 के बाद यह पहला मौका है जब ईरान इस तरह के नेतृत्व संकट और बाहरी हमले के दोहरे दबाव का सामना कर रहा है।


