छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग में बड़ा एक्शन: पूर्व डीईओ को कारण बताओ नोटिस, युक्तियुक्तकरण और पदस्थापना में गड़बड़ियों के आरोप
नई दिल्ली | 20 मार्च 2026
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रतिपादित ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को धरातल पर उतारने के लिए शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने एक क्रांतिकारी राष्ट्रव्यापी अभियान का शंखनाद किया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप, सरकार ने वर्ष 2030 तक प्री-स्कूल से माध्यमिक स्तर तक शत-प्रतिशत सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) प्राप्त करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश में 14-18 वर्ष की आयु के लगभग 2 करोड़ बच्चे औपचारिक शिक्षा से दूर हैं, जिन्हें वापस स्कूल लाने के लिए राष्ट्रीय मुक्त शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) को एक सशक्त और लचीले माध्यम के रूप में चुना गया है।
इस अभियान की सफलता के लिए मंत्रालय ने “एनआईओएस मित्र” नामक एक विशेष तकनीक-आधारित कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की है, जो समुदाय स्तर पर जाकर स्कूल छोड़ चुके बच्चों की पहचान करेगा। प्रशिक्षित प्रशिक्षकों का यह दल न केवल वंचित, आदिवासी, प्रवासी और अल्पसंख्यक समूहों के बच्चों को खोजेगा, बल्कि उन्हें और उनके परिवारों को शैक्षणिक परामर्श देकर पुनः नामांकन की प्रक्रिया को सरल बनाएगा। जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए इस पूरी पहल को एक पारदर्शी डिजिटल निगरानी प्रणाली के साथ जोड़ा गया है, जिससे प्रत्येक बच्चे की प्रगति को ट्रैक करना संभव होगा।
शिक्षा की पहुँच को अंतिम छोर तक पहुँचाने के लिए बुनियादी ढांचे में भी व्यापक विस्तार किया जा रहा है, जिसके तहत देश के प्रत्येक ब्लॉक में कम से कम एक एनआईओएस अध्ययन एवं परीक्षा केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इस योजना के अंतर्गत पीएम श्री स्कूलों, केंद्रीय विद्यालयों और नवोदय विद्यालयों जैसे प्रतिष्ठित सरकारी संस्थानों को एनआईओएस केंद्रों के रूप में नामित किया जाएगा, ताकि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल विकास के अवसर अपने निकटतम स्थान पर मिल सकें। मंत्रालय का यह एकीकृत प्रयास न केवल ड्रॉपआउट दर को कम करेगा, बल्कि उन लाखों छात्रों के लिए भी आशा की नई किरण बनेगा जो प्रतिवर्ष बोर्ड परीक्षाओं में असफल होकर पढ़ाई छोड़ देते हैं।
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