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दुर्ग
छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता के लिहाज से एक बड़ी और महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। दुर्ग वनमंडल के चरौदा (पंचशील नगर) स्थित एक रिहायशी मकान से अत्यंत दुर्लभ श्वेतवर्णी (Leucistic) करैत सर्प का सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है। बेहद जहरीले और अनोखे रंग-रूप वाले इस सांप को स्वास्थ्य परीक्षण के बाद राजनांदगांव वनमंडल के प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया गया है।
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क्यों खास और अलग है यह ‘श्वेतवर्णी’ करैत?
सामान्य करैत सांपों का रंग गहरा और उन पर पट्टियां होती हैं, लेकिन यह करैत पूरी तरह सफेद रंग का दिखाई दे रहा था।
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आनुवंशिक कारण (Leucism): वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, यह ‘ल्यूसिज्म’ (Leucism) नाम की एक बहुत ही दुर्लभ आनुवंशिक स्थिति है। इसमें शरीर के रंगद्रव्य (मेलानिन) की कमी हो जाती है, जिससे जीव का रंग सामान्य से अलग और सफेद दिखने लगता है।
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दक्षिण एशिया में बेहद दुर्लभ: इस तरह के श्वेतवर्णी करैत मिलने की घटनाएं दक्षिण एशिया में बहुत कम दर्ज की गई हैं। भारत में इससे पहले केवल महाराष्ट्र और ओडिशा जैसे कुछ चुनिंदा राज्यों में ही इसके प्रमाण मिले हैं। दुर्ग में इसका मिलना क्षेत्र की समृद्ध वन्यजीव संपदा को दर्शाता है।
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वन विभाग की त्वरित कार्रवाई और सुरक्षित पुनर्वास
21 जुलाई को पंचशील नगर में सफेद सांप दिखने की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम और सर्प मित्र विजय शर्मा मौके पर पहुंचे। सावधानीपूर्वक रेस्क्यू करने के बाद सर्प विशेषज्ञों (अविनाश मौर्य) ने इसके ‘श्वेतवर्णी करैत’ होने की आधिकारिक पुष्टि की।इसके बाद, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशों और वन बल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय के मार्गदर्शन में दुर्ग डीएफओ दीपेश कपिल की देखरेख में इसे सुरक्षित स्थान पर भेजने की योजना बनाई गई।
23 जुलाई 2026 को दुर्ग वन अमले के प्रमोद यादव, विजय शर्मा और अविनाश मौर्य की टीम ने इसे राजनांदगांव वनमंडल के कक्ष क्रमांक आर.एफ. 549 स्थित घने जंगलों में सुरक्षित रूप से मुक्त कर दिया।
“पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण की दिशा में बड़ी पहल”
“दुर्लभ वन्यजीवों का संरक्षण और उनके प्राकृतिक पर्यावास की सुरक्षा राज्य शासन की प्राथमिकता है। इस दुर्लभ प्रजाति के सांप का सुरक्षित रेस्क्यू और पुनर्वास छत्तीसगढ़ की समृद्ध जैव विविधता को बनाए रखने की दिशा में एक अहम कदम है।”

