चेन्नई।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 28 सितंबर को राज्य में एक अनूठी कल्याणकारी योजना ‘थाईमामन थंगा मोतिरम थित्तम’ (मामा की सोने की अंगूठी योजना) की शुरुआत की है। इस योजना के अंतर्गत सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले प्रत्येक पात्र नवजात शिशु को 1 ग्राम की 22 कैरेट सोने की अंगूठी उपहार स्वरूप दी जाएगी।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य परिवारों को वित्तीय सहायता पहुंचाना और महिलाओं को संस्थागत प्रसव (सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी) के लिए प्रोत्साहित करना है। सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए प्रतिवर्ष 755.83 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। योजना का आधिकारिक शासनादेश 23 जून 2026 को जारी किया गया था।
किन बच्चों को मिलेगा लाभ? (पात्रता की शर्तें)
योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित शर्तें पूरी होनी अनिवार्य हैं:शिशु का जन्म तमिलनाडु के किसी सरकारी अस्पताल या सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में हुआ हो।प्रसूता (मां) तमिलनाडु की स्थायी निवासी हो।मां का पंजीकरण PICME (प्रेग्नेंसी एंड इन्फैंट कोहोर्ट मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन) में दर्ज होना चाहिए।मां के पास वैध RCH ID (रिप्रोडक्टिव एंड चाइल्ड हेल्थ आइडेंटिफिकेशन नंबर) होना अनिवार्य है। योजना के तहत जन्म क्रम की कोई सीमा नहीं है; बच्चा पहला हो, दूसरा या तीसरा, सभी पात्र होंगे।
22 जून 2026 से प्रभावी: पिछली तारीख से भी मिलेगा लाभ
यह योजना 22 जून 2026 से पूर्वव्यापी (retrospective) प्रभाव से लागू की गई है। 22 जून मुख्यमंत्री विजय का जन्मदिन है, इसलिए इस तारीख के बाद जन्मे सभी पात्र बच्चों को भी इसका लाभ मिलेगा।
| बच्चे की जन्म तिथि | अंगूठी कब और कहाँ मिलेगी? |
| 22 जून 2026 से योजना शुरू होने तक | राज्य भर के चिन्हित विशेष वितरण केंद्रों से |
| 28 सितंबर 2026 के बाद | डिलीवरी के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज होते समय |
प्रत्येक अंगूठी पर एक विशिष्ट सीरियल नंबर दर्ज होगा और यह टैम्पर-प्रूफ (छेड़छाड़-मुक्त) पैकेजिंग में उपलब्ध कराई जाएगी शुरुआती चरण में वितरण के लिए राज्यभर में 107 केंद्र बनाए गए हैं, जहाँ प्रतिदिन लगभग 100 बच्चों को अंगूठी वितरित करने का लक्ष्य है अंगूठियों की खरीद तमिलनाडु मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (TNMSC) द्वारा की जा रही है। पहले चरण में लगभग 1.28 लाख अंगूठियां वितरित करने का खाका तैयार किया गया है।
‘थाईमामन’ (मामा) नाम के पीछे की परंपरा
यह योजना तमिल संस्कृति की पारंपरिक रस्म ‘थाईमामन सीर’ से प्रेरित है, जिसमें नवजात शिशु के जन्म पर उसके मामा द्वारा सोने के आभूषण या विशेष उपहार देने की परंपरा होती है। राज्य सरकार ने इसी भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव को ध्यान में रखते हुए इस योजना का नामकरण किया है।



