नई दिल्ली/रायपुर | 25 मार्च 2026
भारतीय रेलवे के प्लेटफॉर्म अब केवल ट्रेन पकड़ने की जगह नहीं रह गए हैं, बल्कि वे देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय शिल्पकला के जीवंत शोरूम बन चुके हैं। केंद्र सरकार की ‘एक स्टेशन एक उत्पाद’ (OSOP) पहल ने देश भर के 2,000 से अधिक रेलवे स्टेशनों की सूरत बदल दी है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, 19 जनवरी 2026 तक देश भर में 2,326 ओएसओपी आउटलेट्स चालू हो चुके हैं, जो स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को सीधे तौर पर लाखों यात्रियों से जोड़ रहे हैं। इस योजना से अब तक 1.32 लाख से अधिक व्यक्तियों को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त हुए हैं, जिससे ‘वोकैब फॉर लोकल’ का सपना धरातल पर सच होता दिख रहा है।
सावधान! गैस सिलेंडर बुकिंग के ‘नए नियमों’ का सच आया सामने; सरकार ने वायरल दावों को बताया फर्जी, जानें क्या है रिफिल की सही समय-सीमा
पटना से जयपुर तक, कला का अनूठा संगम
इस पहल के तहत हर स्टेशन अपनी एक विशेष पहचान पेश कर रहा है। बिहार के पटना जंक्शन पर जहाँ यात्री विश्व प्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग्स की खरीदारी कर रहे हैं, वहीं राजस्थान के जयपुर जंक्शन पर सांगानेरी प्रिंट के कपड़ों की जीवंत विरासत यात्रियों को लुभा रही है। इसी तरह, पश्चिम बंगाल के आसनसोल स्टेशन पर हथकरघा बैग और दस्तकारी कालीन मिल रहे हैं, तो तमिलनाडु के चेन्नई मूर मार्केट में पारंपरिक अत्तर (परफ्यूम) और सूती हथकरघा उत्पादों की महक बिखरी हुई है। ओडिशा के बलांगीर स्टेशन पर स्थानीय महिलाओं द्वारा बनाए गए हस्तनिर्मित खिलौने यात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं, जो सीधे तौर पर महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दे रहे हैं।
1 अप्रैल से बदल जाएंगे रेलवे के नियम: टिकट रिफंड के लिए अब 4 नहीं बल्कि 8 घंटे पहले करना होगा कैंसिलेशन
कारीगरों के लिए ‘समृद्धि’ का नया रास्ता
25 मार्च 2022 को शुरू हुई यह योजना विशेष रूप से उन सूक्ष्म और लघु उद्यमियों (MSMEs) के लिए वरदान साबित हुई है, जिनकी पहुंच बड़े औपचारिक बाज़ारों तक नहीं थी। रेलवे स्टेशनों पर मामूली शुल्क पर रोटेशनल आधार पर स्टॉल आवंटित किए जाते हैं, जिससे अधिक से अधिक स्थानीय उत्पादकों को मौका मिल सके। यह मॉडल न केवल पारंपरिक शिल्प को संरक्षित कर रहा है, बल्कि रेलवे स्टेशनों को ऐसे स्थान के रूप में विकसित कर रहा है जहाँ संस्कृति, वाणिज्य और समुदाय का मिलन होता है। अब रेल यात्री केवल सफर ही नहीं करते, बल्कि अपने साथ देश के किसी कोने की अनूठी कला और उसकी कहानी भी स्मृति चिन्ह के रूप में घर ले जाते हैं।

