नई दिल्ली: संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने राज्यसभा में देश के डिजिटल बुनियादी ढांचे की प्रगति रिपोर्ट पेश की। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा ग्रामीण, सीमावर्ती और आकांक्षी जिलों में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड और मोबाइल कनेक्टिविटी के विस्तार के लिए युद्धस्तर पर कदम उठाए जा रहे हैं।
दिसंबर 2025 तक की स्थिति साझा करते हुए उन्होंने जानकारी दी कि भारतनेट परियोजना के अंतर्गत अब तक 2,14,904 ग्राम पंचायतों को हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के लिए पूरी तरह तैयार कर लिया गया है। इसके साथ ही, देश के सुदूर इलाकों को नेटवर्क से जोड़ने के लिए ‘4जी सैचुरेशन’ और अन्य मोबाइल परियोजनाओं के तहत 23,694 मोबाइल टावर चालू किए जा चुके हैं।
डिजिटल कनेक्टिविटी में आए इस सुधार ने विशेष रूप से उन क्षेत्रों में भौगोलिक अंतर को कम करने में सफलता पाई है जो अब तक सुविधाओं से वंचित थे। इस विस्तार के कारण अब ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और महत्वपूर्ण सरकारी सेवाओं तक लोगों की पहुंच पहले से कहीं अधिक बेहतर और आसान हो गई है। सच तो यह है कि इस डिजिटल परिवर्तन ने नागरिकों के आवश्यक सेवाओं के साथ बातचीत करने और लाभ उठाने के तरीके को बुनियादी रूप से बदल कर रख दिया है।
सेवाओं की निरंतरता और स्तर को बनाए रखने के लिए सरकार पूरी तरह सतर्क है। इसके लिए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) द्वारा निर्धारित सेवा की गुणवत्ता (QoS) के मानदंडों और वैश्विक मानकों को कड़ाई से लागू किया गया है। इन तय मानकों के आधार पर सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के प्रदर्शन की समय-समय पर समीक्षा और नियमित निगरानी की जाती है, ताकि उपभोक्ताओं को निर्बाध सेवा मिल सके।
दूरसंचार सेवाओं को हर तबके के लिए किफायती बनाने के उद्देश्य से सरकार ने कई निर्णायक कदम उठाए हैं। जहाँ एक ओर नियामक सरलता के लिए ‘दूरसंचार अधिनियम 2023’ को लागू किया गया है, वहीं दूसरी ओर ‘डिजिटल भारत निधि’ (जिसे पहले सार्वभौमिक सेवा दायित्व कोष के नाम से जाना जाता था) के माध्यम से उन ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में वित्तीय सहायता दी जा रही है जहाँ व्यावसायिक रूप से सेवाएं देना चुनौतीपूर्ण है। इन प्रयासों का एकमात्र लक्ष्य देश के हर कोने में सुलभ, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना है।

