शिक्षा मंत्रालय ने जारी किया PGI 2.0 इंडेक्स: देश के राज्यों और जिलों की शिक्षा व्यवस्था का हुआ कड़ा मूल्यांकन, जानिए मुख्य बातें

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी किया गया परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स दो दशमलव शून्य देश की स्कूली शिक्षा प्रणाली को मजबूत और बेहतर बनाने के लिए राज्यों और जिलों की प्रशासनिक तथा शैक्षणिक व्यवस्था का कड़ा मूल्यांकन करता है। भारत की विशाल शिक्षा प्रणाली में चौदह लाख से अधिक स्कूल, एक करोड़ से ज्यादा शिक्षक और लगभग चौबीस करोड़ छात्र शामिल हैं, जिनकी प्रगति को परखने के लिए इस सूचकांक को मुख्य रूप से चार भागों और छह डोमेन में व्यवस्थित किया गया है।

पहले दो भागों में अंकों की व्यवस्था और मूल्यांकन की श्रेणियों को रखा गया है। राज्यों को कुल सत्तर कड़े मापदंडों के आधार पर एक हजार अंकों में से स्कोर दिया जाता है, जहां किसी को पारंपरिक रैंक देने के बजाय ग्रेडिंग प्रणाली के तहत श्रेणीबद्ध किया जाता है। इसके मूल्यांकन की दो मुख्य श्रेणियां हैं, जिसमें पहली श्रेणी परिणाम बच्चों के सीखने के स्तर और उनकी उपस्थिति को जांचती है, जबकि दूसरी श्रेणी शासन और प्रबंधन प्रशासनिक मजबूती तथा बजट के सही इस्तेमाल पर नजर रखती है।

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तीसरे भाग के अंतर्गत पूरी व्यवस्था को छह प्रमुख डोमेन में विभाजित किया गया है। पहला डोमेन अधिगम परिणाम और गुणवत्ता है जो पारख राष्ट्रीय सर्वेक्षण के माध्यम से यह जांचता है कि बच्चे भाषा और गणित जैसे बुनियादी विषयों को अपनी क्लास के स्तर के अनुसार सीख पा रहे हैं या नहीं। दूसरा डोमेन शिक्षा तक पहुंच है जो स्कूलों में कुल नामांकन अनुपात और स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की ड्रॉपआउट दर पर ध्यान केंद्रित करता है। तीसरा डोमेन अवसंरचना एवं सुविधाएं है जिसके तहत स्कूलों की इमारत, बिजली, पेयजल, छात्र-छात्राओं के लिए अलग शौचालय, खेल के मैदान के साथ-साथ कंप्यूटर और इंटरनेट जैसी आधुनिक डिजिटल व्यवस्थाओं का आकलन होता है। चौथा डोमेन समानता है जो अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और दिव्यांग बच्चों को समान अवसर देने तथा छात्र-छात्राओं के बीच शिक्षा के अंतर को पाटने का काम करता है। पांचवां डोमेन शासन प्रक्रियाएं है जो शिक्षकों और छात्रों की डिजिटल हाजिरी तथा स्कूल फंड के इस्तेमाल में पारदर्शिता सुनिश्चित करता है। छठा डोमेन शिक्षक शिक्षा एवं प्रशिक्षण है जो स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता और उन्हें राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत मिलने वाली आधुनिक ट्रेनिंग को ट्रैक करता है।

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चौथे और अंतिम भाग में इस पूरी रैंकिंग को निष्पक्ष रखने वाले विश्वसनीय स्रोतों तथा इसके महत्व को दर्शाया गया है। इस सूचकांक को तैयार करने के लिए यूडीआईएसई प्लस पोर्टल से स्कूलों और शिक्षकों के आंकड़े, पारख सर्वेक्षण से पढ़ाई की गुणवत्ता, पीएम पोषण पोर्टल से मिड-डे मील की स्थिति, प्रबंध पोर्टल से बजट खर्च का लाइव डेटा और विद्यांजलि पोर्टल से सामाजिक सहयोग के आंकड़े लिए जाते हैं। संक्षेप में कहें तो यह इंडेक्स सभी राज्यों के लिए एक सच्चे आईने की तरह काम करता है जो उन्हें बिना किसी भेदभाव के उनकी वास्तविक स्थिति दिखाता है, ताकि वे अपनी कमियों को पहचानकर ड्रॉपआउट दर रोकने या डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने जैसे जरूरी क्षेत्रों में सही दिशा में काम कर सकें।

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