टाटा मोटर्स ने दिया झटका: 1 अक्टूबर से महंगे होंगे सभी कमर्शियल वाहन, इस साल दूसरी बार बढ़ेंगे दाम
नई दिल्ली: देश में प्रतिबंधित और संवेदनशील दवाओं की अवैध बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए केंद्र सरकार सख्त कदम उठाने जा रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दवाओं की खुदरा और थोक बिक्री पर निगरानी मजबूत करने के उद्देश्य से दवा नियमावली, 1945 (Drugs Rules, 1945) में बड़े संशोधन का मसौदा तैयार किया है। इसके तहत अब सभी मेडिकल स्टोर्स और दवा दुकानों पर सीसीटीवी कैमरे (CCTV) लगाना कानूनी रूप से अनिवार्य किया जा सकता है।
मंत्रालय ने इस प्रस्तावित बदलाव को लेकर आधिकारिक प्रारूप राजपत्र अधिसूचना (Draft Gazette Notification) जारी कर दी है।
बिना पर्चे के बिकने वाली संवेदनशील दवाओं पर लगेगी रोक
इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य गंभीर और आदत लगाने वाली दवाओं की अनधिकृत बिक्री को रोकना है:
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शेड्यूल H, H1 और X दवाएं: एंटीबायोटिक्स, पेनकिलर्स, नींद की गोलियां, एंटी-डिप्रेसेंट और नारकोटिक्स श्रेणी में आने वाली इन दवाओं की बिक्री बिना डॉक्टर के वैध पर्चे (Prescription) के पूरी तरह प्रतिबंधित है।
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अतिरिक्त सुरक्षा कवच: दुकानों पर सीसीटीवी लगने से यह साफ रिकॉर्ड रहेगा कि दवाएं डॉक्टर के पर्चे के आधार पर बेची जा रही हैं या बिना पर्चे के अवैध तरीके से दी जा रही हैं।
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पारदर्शिता और जवाबदेही: इससे पूरी दवा आपूर्ति श्रृंखला (ड्रग सप्लाई चेन) में पारदर्शिता बढ़ेगी और नियमों का उल्लंघन करने वाले मेडिकल संचालकों पर कानूनी कार्रवाई आसान होगी।
DTAB ने दी हरी झंडी, जनता से मांगे सुझाव
प्रस्ताव को लागू करने से पहले तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर गहन विचार-विमर्श किया गया है:इस प्रस्ताव पर सबसे पहले औषधि परामर्श समिति में चर्चा हुई, जिसके बाद इसे औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड (DTAB) के समक्ष रखा गया। डीटीएबी ने इस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी देते हुए इसे लागू करने की सिफारिश की है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने आम जनता, दवा व्यापारियों, केमिस्ट एसोसिएशनों और संबंधित हितधारकों से इस ड्राफ्ट पर आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। समीक्षा के बाद इसे अंतिम रूप से पूरे देश में लागू किया जाएगा।

