रायपुर:
छत्तीसगढ़ में मानसून के सरकारी आंकड़े भले ही 100.7% की सामान्य बारिश का संतोषजनक ग्राफ दिखा रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत बादलों के भारी असंतुलन की कहानी कह रही है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 6 सितंबर तक प्रदेश में औसतन 926.5 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो अपेक्षित 920.3 मिमी की तुलना में बेहतर है। इसके बावजूद जिलों के बीच भारी असमानता देखने को मिल रही है, जहां उत्तर छत्तीसगढ़ का बलरामपुर जिला 1,438 मिमी बारिश के साथ सामान्य से 179.4% अधिक पानी दर्ज कर शीर्ष पर है, वहीं बेमेतरा जिला महज 540.6 मिमी वर्षा के साथ प्रदेश में सबसे सूखा बना हुआ है।
विशेष रूप से दक्षिण छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग सूखे के सबसे बड़े संकट से जूझ रहा है। भारी वर्षा वाले इस अंचल में कांकेर जिले में सामान्य की तुलना में महज 63.3% ही वर्षा दर्ज हुई है, जो प्रदेश में सबसे बड़ी कमी है। इसी प्रकार सुकमा में 67.5%, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 70.6%, बस्तर में 77.0% और कोंडागांव में 78.7% बारिश हुई है। बीजापुर जिले में कुल 1,236.8 मिमी पानी गिरने के बावजूद वहां के भारी औसत वर्षा के मानकों के लिहाज से यह सामान्य का केवल 75.7% ही है, जिससे संभाग में खेती-किसानी पर संकट मंडराने लगा है।
इसके ठीक उलट, उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ में बादलों की भरपूर मेहरबानी देखने को मिली है। बलरामपुर के अतिरिक्त सारंगढ़-बिलाईगढ़ में सामान्य का 155.7% (1,107.9 मिमी) और राजधानी रायपुर में 135.7% (1,031.2 मिमी) पानी गिर चुका है। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 131.6%, महासमुंद में 128.6% और गरियाबंद में 121.1% वर्षा दर्ज की गई है। कुल मिलाकर राज्य स्तर पर मानसून का आंकड़ा संतुलित और हरा-भरा दिख रहा है, लेकिन दक्षिण छत्तीसगढ़ के कई प्यासे जिलों में बारिश की यह भारी कमी आने वाले दिनों में जल संकट और फसल उत्पादन की चुनौती खड़ी कर सकती है।

