रायपुर। छत्तीसगढ़ की राज्यसभा सीटों को लेकर पिछले कई दिनों से चल रहे सियासी सस्पेंस का आखिरकार पटाक्षेप हो गया है। कांग्रेस आलाकमान ने नामांकन की अंतिम घड़ी से ठीक पहले अपने पत्ते खोलते हुए वर्तमान सांसद फूलो देवी नेताम को दोबारा उच्च सदन भेजने का बड़ा फैसला लिया है। कल नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि है, जिसे देखते हुए पार्टी नेतृत्व पर निर्णय लेने का भारी दबाव था। विधानसभा सचिवालय के अनुसार, कल दोपहर 3 बजे तक पर्चा भरा जा सकता है, जिससे अब राजधानी रायपुर की राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
इस चयन के पीछे कांग्रेस ने गहरे सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को साधने की कोशिश की है। सूत्रों की मानें तो पार्टी के भीतर पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव, मौजूदा सांसद फूलो देवी नेताम और प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के नामों पर लंबा मंथन चला। अंततः सांगठनिक संतुलन और बस्तर क्षेत्र में आदिवासियों की मजबूत आवाज को प्राथमिकता देते हुए आलाकमान ने फूलो देवी के नाम पर सहमति जताई। गौर करने वाली बात यह है कि भारतीय जनता पार्टी ने भी इस बार महिला प्रत्याशी लक्ष्मी वर्मा को मैदान में उतारा है, ऐसे में कांग्रेस ने भी महिला कार्ड खेलकर मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।
फूलो देवी नेताम केवल एक सांसद नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ कांग्रेस का एक बेहद कद्दावर चेहरा हैं। वर्तमान में छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष और कांग्रेस कार्य समिति की सदस्य रह चुकीं फूलो देवी को बस्तर अंचल की एक प्रखर आदिवासी नेता के रूप में पहचाना जाता है। साल 2020 में राज्यसभा पहुंचने के बाद उन्होंने सदन में सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था। अब चूंकि उनका कार्यकाल 2 अप्रैल को समाप्त हो रहा है, उनकी सक्रियता को देखते हुए पार्टी ने उन्हें एक और मौका देने का मन बनाया है।
राज्यसभा चुनाव के मौजूदा गणित पर नजर डालें तो छत्तीसगढ़ विधानसभा में भाजपा के पास 54 सीटों का प्रचंड बहुमत है, जबकि कांग्रेस 35 सीटों के साथ विपक्ष में है। संख्या बल के आधार पर दो रिक्त सीटों में से एक भाजपा और एक कांग्रेस के पाले में जाना लगभग तय माना जा रहा है। कांग्रेस के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि वह आने वाले समय में महिला और आदिवासी नेतृत्व को आगे रखकर अपनी रणनीति को और धार देना चाहती है।


