विशेष संवाददाता
नई दिल्ली। देश की ग्राम पंचायतों में लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव मानी जाने वाली ‘ग्राम सभाओं’ में आम नागरिकों और विशेष रूप से महिलाओं की कम व अनियमित उपस्थिति पर केंद्र सरकार ने गहरी चिंता व्यक्त की है। केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (NIRDPR) द्वारा तैयार की गई एक व्यापक अध्ययन रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं को साझा किया। यह रिपोर्ट जून 2026 में जारी की गई थी, जिसमें ग्रामीण शासन प्रणाली में व्याप्त व्यावहारिक कमियों और सामाजिक बाधाओं का गहराई से विश्लेषण किया गया है। अध्ययन के दौरान यह बात प्रमुखता से सामने आई है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका और रोज़गार की व्यस्तता, बैठकों और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता की कमी, बैठकों में अधिकारियों की गैर-मौजूदगी और शिकायतों पर सुस्त कार्रवाई जैसे कारणों से आम लोग ग्राम सभाओं से दूरी बना रहे हैं।
रिपोर्ट में महिलाओं की भागीदारी को लेकर भी कई अहम खुलासे हुए हैं। त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में आरक्षण के बावजूद महिलाओं की सक्रिय उपस्थिति के मार्ग में पारिवारिक जिम्मेदारियाँ, सामाजिक संकोच और बैठकों के दौरान पुरुषों का प्रभुत्व जैसी पारंपरिक बाधाएं आज भी बनी हुई हैं। भारत के संविधान के अनुच्छेद 243B और 243A के तहत ग्राम सभाओं को व्यापक अधिकार दिए गए हैं, लेकिन व्यावहारिक धरातल पर जानकारी और संसाधनों के अभाव में यह संस्थाएं पूरी तरह प्रभावी साबित नहीं हो पा रही हैं। इस स्थिति में सुधार लाने के लिए पंचायती राज मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कड़े दिशा-निर्देश और परामर्शिकाएँ जारी की हैं। इसके तहत ग्राम सभाओं की बैठकें बढ़ाने, कोरम यानी न्यूनतम उपस्थिति अनिवार्य करने, बैठकों से पहले अलग से महिला और वार्ड सभाएं आयोजित करने तथा स्थायी उप-समितियों को सक्रिय करने की सलाह दी गई है।
ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने और महिलाओं व युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार कई महत्वाकांक्षी योजनाएं भी चला रही है। मंत्रालय द्वारा संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) के माध्यम से जनप्रतिनिधियों और वंचित वर्गों का क्षमता निर्माण किया जा रहा है। विशेष रूप से महिला जनप्रतिनिधियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘सशक्त पंचायत नेत्री अभियान’ के तहत प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में ‘महिला-नेतृत्व वाले शासन’ को सही मायने में मजबूती मिल सके। इसके अलावा, स्कूली बच्चों में लोकतंत्र की समझ विकसित करने के लिए ‘आदर्श युवा ग्राम सभा’ की शुरुआत की गई है, जहाँ बच्चे मॉक सत्रों में एजेंडा तय करने से लेकर बजट बनाने तक का काम सीखते हैं। शासन में पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल माध्यमों का सहारा भी लिया जा रहा है, जिसके तहत ई-ग्रामस्वराज पोर्टल और ‘पंचायत निर्णय’ जैसे मोबाइल ऐप के माध्यम से बैठकों के शेड्यूलिंग, फैसलों और विकास योजनाओं का रियल-टाइम डिजिटल रिकॉर्ड रखा जा रहा है।

