रायपुर: जमीन की रजिस्ट्री कराने के बाद पटवारी और तहसील कार्यालयों के चक्कर काटने का दौर अब छत्तीसगढ़ में इतिहास बन चुका है। राज्य सरकार के राजस्व विभाग ने ‘सेवा के संकल्प’ अभियान के तहत पूरी व्यवस्था को ऑनलाइन और ऑटोमैटिक कर दिया है। ‘भुईयां’ और ‘भू-नक्शा’ प्रोजेक्ट के जरिए अब जमीन की रजिस्ट्री होते ही उसका नामांतरण अपने-आप शुरू हो जाता है, जबकि जमीन के सभी अहम दस्तावेज घर बैठे सीधे मोबाइल पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
रजिस्ट्री होते ही ‘ऑटो नामांतरण’ शुरू, 15 दिन में जमीन डायवर्सन
राज्य के 105 उप-पंजीयक (रजिस्ट्रार) दफ्तरों को सीधे ‘भुईयां’ पोर्टल से जोड़ दिया गया है। रजिस्ट्री पूरी होते ही सिस्टम खुद-ब-खुद खरीदार के नाम पर ‘ऑटो नामांतरण’ (Auto Mutation) की फाइल आगे बढ़ा देता है। जमीन का आवासीय या व्यावसायिक उपयोग बदलने (डायवर्सन) के लिए अब महीनों इंतजार नहीं करना पड़ेगा। ‘ऑटो व्यपवर्तन’ प्रणाली के जरिए यह काम अधिकतम 15 दिनों में पूरा हो रहा है और सरकारी गाइडलाइन दरें भी सॉफ्टवेयर से अपने-आप तय हो रही हैं।
किसानों और जमीन मालिकों को अपने प्रमाणित खसरा और बी-1 (B-1) पर्चे के लिए पटवारी के पास जाने की जरूरत नहीं है। अब एक सामान्य व्हाट्सएप मैसेज के जरिए ये दोनों दस्तावेज तुरंत डाउनलोड किए जा सकते हैं।जमीनी विवादों के समाधान के लिए ‘ई-कोर्ट’ व्यवस्था शुरू कर दी गई है। लोग घर बैठे ऑनलाइन केस फाइल कर सकते हैं। पेशी की तारीख, आदेश और केस की हर प्रगति की सूचना सीधे मोबाइल पर SMS से मिलती है। पटवारी और रजिस्ट्रार के डिजिटल हस्ताक्षर से युक्त किसान ऋण पुस्तिका पोर्टल पर ऑटो-जनरेट हो रही है, जिसे आगे चलकर सिविल कोर्ट से भी जोड़ा जाएगा।
प्रदेश के 20,298 गांवों के खसरा और 19,723 गांवों के भू-नक्शों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर पब्लिक डोमेन पर डाल दिया गया है, जिससे कागजों में छेड़छाड़ की गुंजाइश खत्म हो गई है। राज्य की 158 तहसीलों में ‘मॉडर्न रिकॉर्ड रूम’ बनाए गए हैं, जहां सालों पुराने मूल दस्तावेज सुरक्षित रखे गए हैं ताकि उनके गुम होने या दीमक लगने का खतरा हमेशा के लिए खत्म हो सके।


