छत्तीसगढ़ सहित देशभर में इन दिनों शक्कर की आपूर्ति लड़खड़ाने से आम जनता को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक तरफ जहां खुले बाजार में खुदरा कीमतें ₹65 से ₹70 प्रति किलो तक पहुंच गई हैं, वहीं दूसरी तरफ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत राशन दुकानों से भी शक्कर नदारद है। इसके चलते गरीब परिवारों को मिलने वाली ₹17 प्रति किलो की रियायती चीनी का लाभ नहीं मिल पा रहा है और लोग बाजार से महंगे दामों पर चीनी खरीदने को मजबूर हैं।
5 महीने से आपूर्ति ठप, अंत्योदय वर्ग पर सबसे ज्यादा असर
जिला खाद्य नागरिक आपूर्ति निगम के अनुसार, राज्य में राशन कार्डधारियों को प्रति माह प्रति कार्ड 1 किलोग्राम शक्कर ₹17 की दर से दी जाती है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत पिछले करीब 5 महीनों से शक्कर की पर्याप्त सप्लाई नहीं आ रही है। इसका सबसे बुरा असर अत्यंत गरीब अंत्योदय श्रेणी के कार्डधारियों पर पड़ रहा है।
प्रदेश में कुल कार्डधारक: 83 लाख 37 हजार से अधिक (जिनमें 18.81 लाख अंत्योदय, 8.43 लाख एपीएल, 28,964 निराश्रित और 17,795 निःशक्तजन कार्ड शामिल हैं)। अपर्याप्त भंडारण के कारण प्रदेशभर में हर महीने 5 लाख से अधिक कार्डधारकों को शक्कर नहीं मिल पा रही है। 6.5 लाख कार्डधारकों में से करीब 50 हजार परिवार हर महीने चीनी से वंचित रह जाते हैं। समय पर स्टॉक न पहुंचने और महीना खत्म होने से उनका कोटा लैप्स हो जाता है।
दुकानदारों को मिल रहा केवल 50% स्टॉक
उचित मूल्य दुकान संचालकों का कहना है कि वे हर महीने अपने पंजीकृत कार्डधारकों की संख्या के हिसाब से पूरी मांग भेजते हैं, लेकिन नागरिक आपूर्ति निगम से अधिकतम 50 फीसदी ही भंडारण कराया जाता है। इसके कारण राशन बांटते समय आधी से ज्यादा आबादी को खाली हाथ लौटाना पड़ता है।
“राशन दुकानों में मांग के अनुरूप शक्कर का भंडारण कराना अनिवार्य है। यदि कहीं भंडारण में कोताही या लापरवाही बरती जा रही है, तो उसकी पूरी जांच कर जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रस्ताव भेजा जाएगा।”
— कीर्तिमान सिंह राठौर, अपर कलेक्टर, रायपुर