स्विट्जरलैंड के दावोस में चल रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम WEF 2026 के दौरान आंध्र प्रदेश सरकार की एक संभावित पहल ने देशभर में चर्चा छेड़ दी है। आंध्र प्रदेश के आईटी मंत्री नारा लोकेश ने संकेत दिए हैं कि राज्य सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पाबंदी लगाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। यह कदम ऑस्ट्रेलिया के हालिया कानून से प्रेरित हो सकता है।

मीडिया से बातचीत में नारा लोकेश ने कहा कि कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया पर उपलब्ध कंटेंट की गंभीरता और उसके मानसिक सामाजिक प्रभावों को पूरी तरह समझने में सक्षम नहीं होते। ऐसे में बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने के लिए एक मजबूत और स्पष्ट कानूनी ढांचे की जरूरत है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव बच्चों की आजादी छीनने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें नुकसानदायक डिजिटल माहौल से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से है।

तेलुगु देशम पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता दीपक रेड्डी ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में सोशल मीडिया का दुरुपयोग तेजी से बढ़ा है, खासकर महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियों और ऑनलाइन उत्पीड़न के मामलों में। ऐसे माहौल में बच्चों का मानसिक रूप से प्रभावित होना एक गंभीर चिंता का विषय है।

सरकार का मानना है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चे अभी इतने परिपक्व नहीं होते कि वे इंटरनेट पर मौजूद हिंसक, भ्रामक और नकारात्मक कंटेंट के असर को संभाल सकें। इसी कारण आंध्र प्रदेश सरकार वैश्विक स्तर पर अपनाए गए मॉडलों का अध्ययन कर रही है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया का कानून सबसे प्रमुख उदाहरण है।

गौरतलब है कि हाल ही में ऑस्ट्रेलिया की प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की सरकार ने एक ऐतिहासिक कानून पारित किया है, जिसके तहत 16 साल से कम उम्र के बच्चे टिकटॉक, फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अकाउंट नहीं बना सकते। नए नियमों के अनुसार बच्चों के पुराने अकाउंट्स भी बंद किए जाएंगे। इस कानून की खास बात यह है कि नियम तोड़ने पर बच्चों या उनके माता-पिता को सजा नहीं दी जाएगी, बल्कि नियमों का पालन न करने वाली सोशल मीडिया कंपनियों पर लगभग 32 मिलियन डॉलर तक का भारी जुर्माना लगाया जाएगा। हालांकि बच्चे बिना लॉगिन किए सार्वजनिक कंटेंट देख सकेंगे।

अगर आंध्र प्रदेश इस तरह का कानून लागू करता है, तो वह भारत का पहला राज्य होगा जो बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर स्पष्ट उम्र आधारित प्रतिबंध लगाएगा। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष मद्रास हाई कोर्ट ने भी केंद्र सरकार को ऑस्ट्रेलिया जैसे सख्त कानूनों पर विचार करने की सलाह दी थी। वहीं ब्रिटेन भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।

आंकड़ों के मुताबिक 10 से 15 साल की उम्र के 96 प्रतिशत बच्चे सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं और इनमें से करीब 70 प्रतिशत बच्चे हिंसक या अनुचित कंटेंट के संपर्क में आते हैं। आंध्र प्रदेश सरकार इन्हीं चिंताजनक आंकड़ों को बदलने और बच्चों के डिजिटल भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में कदम उठाने की तैयारी में है।

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