रायपुर, 6 मार्च 2026। प्रदेश की सड़कों की गुणवत्ता और समयसीमा को लेकर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अब तक का सबसे सख्त रुख अपनाया है। मंत्रालय महानदी भवन में लोक निर्माण विभाग (PWD) की हाई-लेवल मीटिंग में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि सड़कों के निर्माण में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को दोटूक चेतावनी दी कि अब ऑफिस में बैठने के बजाय फील्ड में उतरकर काम देखना होगा; अगर सड़क खराब निकली तो जिम्मेदारी तय होगी और ठेकेदारों को सीधे ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।

बागबहार-कोतबा सड़क पर नाराजगी: “4 साल भी न चले तो क्या फायदा?”

समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने जशपुर जिले की बागबहार–कोतबा सड़क की बदहाली पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सवाल उठाया कि जो सड़क कुछ साल पहले ही बनी थी, वह इतनी जल्दी कैसे उखड़ गई? मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी सड़कों के निर्माण की गहन जांच की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि टेंडर जारी होने से लेकर काम शुरू होने तक की पूरी प्रक्रिया की डेडलाइन तय की जाए, ताकि काम लटकाने का खेल बंद हो सके।

“लो-रेट” के नाम पर गुणवत्ता से समझौता बर्दाश्त नहीं
अक्सर ठेकेदार काम हथियाने के लिए बहुत कम दर (बिलो रेट) पर टेंडर ले लेते हैं और बाद में गुणवत्ता बिगाड़ देते हैं। इस पर प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ठेकेदार कितने भी कम रेट पर काम ले, लेकिन गुणवत्ता और समय से कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अन्य राज्यों की बेहतरीन तकनीकों का अध्ययन करें और सड़कों के रखरखाव के लिए एक ऐसा स्मार्ट सिस्टम विकसित करें, जिससे गड्ढों की जानकारी मिलते ही तत्काल मरम्मत हो सके।

300 ‘कटे हुए’ गांवों के लिए खुलेगी राह
बैठक में एक संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के लगभग 300 गांव मानसून के दौरान दुनिया से कट जाते हैं। मरीजों को खाट पर ले जाने की तस्वीरें विचलित करने वाली हैं। उन्होंने खाद्य विभाग की सूची के आधार पर इन गांवों को प्राथमिकता से पक्की सड़कों और पुल-पुलियों से जोड़ने का अल्टीमेटम दिया। साथ ही लैलूंगा-तमनार मार्ग और NH-43 (जशपुर-झारखंड सीमा) जैसी बड़ी परियोजनाओं की प्रगति की भी बारीकी से समीक्षा की।

पुराने ढर्रे के डिजाइन अब नहीं चलेंगे
शासकीय भवनों पर चर्चा करते हुए श्री साय ने कहा कि अब पुराने और एक जैसे दिखने वाले ‘सरकारी’ डिजाइनों का दौर खत्म होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को आधुनिक आर्किटेक्चर और वर्टिकल कंस्ट्रक्शन (ऊंची इमारतें) अपनाने के निर्देश दिए ताकि जमीन का बेहतर उपयोग हो सके। उन्होंने विशेष रूप से राजभवन में बन रहे गेस्ट हाउस को आधुनिक और गरिमामय स्वरूप देने को कहा।

मुख्यमंत्री ने कहा : “सड़कें सीधे सरकार की छवि से जुड़ी होती हैं। लोग अन्य विकास कार्यों को भले न देखें, लेकिन खराब सड़क उन्हें तुरंत दिखती है। विभाग ऐसा तंत्र बनाए कि काम पूरा होने के बाद नहीं, बल्कि निर्माण के दौरान ही कड़ी निगरानी हो।”

इस कड़क समीक्षा बैठक में उपमुख्यमंत्री व पीडब्ल्यूडी मंत्री श्री अरुण साव, मुख्य सचिव श्री विकास शील और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह सहित विभाग के आला अफसर मौजूद रहे।

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