जशपुर/अंबिकापुर। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी यूडीआईएसई+ (UDISE+) 2025-26 रिपोर्ट देश की स्कूली शिक्षा में सुधार का दावा करती है। रिपोर्ट के अनुसार शिक्षकों की संख्या बढ़ी है, छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) बेहतर हुआ है, ड्रॉपआउट दर में कमी आई है और अधिक विद्यार्थी अगली कक्षाओं तक पहुंच रहे हैं। लेकिन जशपुर और सरगुजा संभाग के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन राष्ट्रीय उपलब्धियों का लाभ दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों तक भी समान रूप से पहुंचा है?
जशपुर और सरगुजा संभाग के कई गांव आज भी ऐसे हैं जहां विद्यार्थियों को माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालय तक पहुंचने के लिए कई किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। बरसात के मौसम में यह दूरी और चुनौतीपूर्ण हो जाती है। ऐसे में रिपोर्ट में दर्ज ड्रॉपआउट दर में कमी इन जिलों के लिए उम्मीद की खबर है। राष्ट्रीय स्तर पर प्राथमिक कक्षाओं में ड्रॉपआउट दर 2.3 प्रतिशत से घटकर 1.8 प्रतिशत और माध्यमिक स्तर पर 8.2 प्रतिशत से घटकर 7 प्रतिशत हो गई है।
हालांकि शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल राष्ट्रीय आंकड़ों से जशपुर और सरगुजा की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट नहीं होती। यहां आर्थिक स्थिति, मौसमी पलायन, दुर्गम भौगोलिक क्षेत्र और परिवहन जैसी चुनौतियां अभी भी अनेक विद्यार्थियों की पढ़ाई को प्रभावित करती हैं। इसलिए राज्य और जिला स्तर के आंकड़े आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इन दोनों जिलों में ड्रॉपआउट दर में कितनी कमी आई है।
रिपोर्ट में ट्रांजिशन रेट में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। आधारभूत से प्रारंभिक स्तर का ट्रांजिशन 99.2 प्रतिशत, प्रारंभिक से मध्य स्तर 93.8 प्रतिशत और मध्य से माध्यमिक स्तर 88.3 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसका अर्थ है कि पहले की तुलना में अधिक विद्यार्थी अगली कक्षा में प्रवेश ले रहे हैं।
जशपुर और सरगुजा के संदर्भ में यह आंकड़ा बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन क्षेत्रों में कक्षा 8 और 10 के बाद पढ़ाई छोड़ने की समस्या लंबे समय से चिंता का विषय रही है। यदि स्थानीय स्तर पर भी ट्रांजिशन रेट में सुधार हुआ है, तो इसका सीधा असर उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के अवसरों पर दिखाई देगा।
यूडीआईएसई+ रिपोर्ट के अनुसार देश में शिक्षकों की संख्या में 8.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है तथा छात्र-शिक्षक अनुपात में भी सुधार दर्ज किया गया है। लेकिन जशपुर और सरगुजा संभाग के कई ग्रामीण एवं वनांचल स्कूलों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी, रिक्त पद और एकल शिक्षक विद्यालय जैसी समस्याएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई नियुक्तियों का लाभ इन जिलों तक कितना पहुंचा।
डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में भी राष्ट्रीय स्तर पर प्रगति दर्ज की गई है। कंप्यूटर सुविधा वाले विद्यालयों का प्रतिशत 69.9 और इंटरनेट सुविधा वाले विद्यालयों का प्रतिशत 67.4 हो गया है। लेकिन जशपुर और सरगुजा के कई दूरस्थ गांवों में इंटरनेट नेटवर्क और बिजली की अनियमित उपलब्धता अभी भी ऑनलाइन शिक्षा की सबसे बड़ी बाधाओं में शामिल है। ऐसे में केवल कंप्यूटर उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं, बल्कि उनका नियमित उपयोग भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
रिपोर्ट बताती है कि देश में अधिकांश विद्यालयों में बिजली, पेयजल, शौचालय और हाथ धोने जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं। जशपुर और सरगुजा में भी पिछले कुछ वर्षों में स्कूल भवनों और आधारभूत सुविधाओं में सुधार हुआ है, लेकिन कई दूरस्थ स्कूलों में विज्ञान प्रयोगशाला, पुस्तकालय, खेल सामग्री और डिजिटल संसाधनों की कमी अब भी चुनौती बनी हुई है।
छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) में ऐतिहासिक प्रगति, NEP के राष्ट्रीय मानकों को पछाड़ा
जिले के लिए सबसे बड़े सवाल
अब निगाहें छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले जिला-वार UDISE+ आंकड़ों पर हैं। सबसे महत्वपूर्ण सवाल होंगे—
- क्या जशपुर और सरगुजा में ड्रॉपआउट दर राष्ट्रीय औसत से कम हुई?
- क्या कक्षा 8 और 10 के बाद पढ़ाई छोड़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या घटी?
- क्या शिक्षकों के रिक्त पद भरे गए?
- क्या सभी हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों तक डिजिटल सुविधाएं पहुंचीं?
- क्या आदिवासी और दूरस्थ गांवों के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर के बराबर अवसर मिल पाए?
इन सवालों के जवाब आने वाले जिला-स्तरीय आंकड़ों से मिलेंगे। फिलहाल UDISE+ 2025-26 रिपोर्ट यह जरूर बताती है कि देश की शिक्षा व्यवस्था सुधार की दिशा में आगे बढ़ रही है। अब सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि यह सुधार जशपुर और सरगुजा के अंतिम गांव तक भी समान रूप से पहुंचे।
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