जशपुर की आबोहवा में छिपा है छत्तीसगढ़ का नया ‘एग्रो-स्वर्ग’”, बस पहल की जरुरत
सोगड़ा जशपुर 17 जनवरी 2026
जशपुर जिले के सुप्रसिद्ध आध्यात्मिक केंद्र ब्रह्मनिष्ठालय सोगड़ा के तत्वावधान में माघ कृष्णपक्ष चतुर्दशी के पावन अवसर पर अनन्य दिवस का पर्व अत्यंत श्रद्धा और भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर मधेश्वर लावा और मनोरमा नदियों के पवित्र त्रिवेणी संगम चड़िया संगम तट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। जय अघोरेश्वर के जयघोष से समूचा क्षेत्र भक्तिरस में डूबा नजर आया।
आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी पावन तिथि को परमपूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी को माता अन्नपूर्णा ने साक्षात दर्शन देकर अपना दिव्य आशीर्वाद प्रदान किया था। इसी अलौकिक स्मृति को जीवंत रखने के लिए प्रतिवर्ष अनन्य दिवस का आयोजन किया जाता है। श्रद्धालुओं का दृढ़ विश्वास है कि इस दिन चड़िया संगम में स्नान और पूजन करने से विशेष आध्यात्मिक फल की प्राप्ति होती है।
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कार्यक्रम की शुरुआत तड़के सुबह सोगड़ा आश्रम से निकाली गई प्रभात फेरी से हुई। श्रद्धालु अघोरेश्वर आसन और सर्वेश्वरी ध्वज के साथ जयकारे लगाते हुए चड़िया संगम पहुंचे। दोपहर में आयोजित आध्यात्मिक गोष्ठी में विद्वानों ने अघोरेश्वर महाप्रभु के मानवतावादी विचारों अघोर पथ के दर्शन और सेवा के संदेश पर विस्तार से प्रकाश डाला।
शाम के समय भजन कीर्तन के बाद भव्य संध्या आरती का आयोजन किया गया। इसके पश्चात अघोरेश्वर आसन और पवित्र ध्वज को ससम्मान पुनः सोगड़ा आश्रम ले जाया गया।
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इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के साथ साथ झारखंड बिहार उत्तर प्रदेश और ओडिशा से भी हजारों श्रद्धालु अनन्य दिवस में शामिल होने पहुंचे। आश्रम से जुड़े मानस सिंह ने बताया कि अनन्य दिवस केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि मानवता सेवा और समर्पण के संकल्प को दोहराने का पर्व है।
श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति को देखते हुए प्रशासन एवं स्वयंसेवकों द्वारा सुरक्षा और व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पूरे आयोजन के दौरान चड़िया संगम क्षेत्र श्रद्धा भक्ति और उल्लास से सराबोर दिखाई दिया।
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