राज्य विद्युत वितरण कंपनी ने बिजली कनेक्शन का लोड (स्वीकृत क्षमता) बढ़ाने पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत, यदि किसी उपभोक्ता के परिसर में लगातार तीन महीने तक स्वीकृत सीमा से अधिक बिजली की खपत होती है और कंपनी द्वारा स्वतः लोड बढ़ाया जाता है, तो उसका अतिरिक्त शुल्क तुरंत अगले महीने के बिल में नहीं जोड़ा जाएगा। यह राशि अब सीधे दिसंबर के बिजली बिल में समायोजित (Adjust) की जाएगी।
अचानक भारी-भरकम बिल से मिलेगी मुक्ति
विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि इस फैसले से उपभोक्ताओं पर एक साथ अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। पहले की व्यवस्था में, लगातार तीन महीने अधिक खपत होने पर कंपनी स्वतः लोड बढ़ाकर उसका पूरा शुल्क अगले ही महीने के बिल में जोड़ देती थी। पूर्व सूचना न होने के कारण बिल की राशि अचानक बढ़कर आती थी, जिससे उपभोक्ताओं में असंतोष फैलता था और बिजली दफ्तरों में शिकायतों का अंबार लग जाता था। इस नई व्यवस्था से बिलों को लेकर होने वाले विवादों में बड़ी कमी आएगी।
सुरक्षा मानकों के तहत बढ़ाया जाता है लोड
कंपनी के अनुसार, स्वीकृत क्षमता से अधिक बिजली का लगातार उपयोग होने पर तकनीकी और सुरक्षा मानकों के अनुरूप ही लोड बढ़ाया जाता है। इससे उपभोक्ता के परिसर की वायरिंग, कनेक्शन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की सुरक्षा बनी रहती है। हालांकि, तत्काल शुल्क जुड़ने से आ रही व्यावहारिक समस्याओं और शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए ही शुल्क वसूली को दिसंबर तक स्थगित करने का निर्णय लिया गया है।
स्वेच्छा से भी बढ़ा सकते हैं अपना लोड
कंपनी ने उपभोक्ताओं को यह भी सुझाव दिया है कि जिन घरों या प्रतिष्ठानों में अधिक बिजली का उपयोग हो रहा है, वे स्वयं बिजली कार्यालय में आवेदन देकर अपना स्वीकृत लोड बढ़वा सकते हैं। ऐसा करने से वे भविष्य में लगने वाले अतिरिक्त भार शुल्क और बिल संबंधी किसी भी प्रकार के भ्रम या विवाद से बच सकेंगे। इस नए फैसले से विशेष रूप से उन घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, जो हर महीने अचानक बढ़े हुए बिजली बिल से परेशान होते थे।



