नई दिल्ली: 2016 में जब UPI शुरू हुआ, तब इसका लक्ष्य लोगों को डिजिटल पेमेंट की आदत डालना था। इसलिए इसे पूरी तरह मुफ्त (Zero MDR) रखा गया। पिछले 10 वर्षों में लेनदेन ₹0.07 लाख करोड़ से बढ़कर ₹314 लाख करोड़ के पार पहुंच गया। लेन-देन में 4,000 गुना से अधिक की इस अप्रत्याशित वृद्धि ने मौजूदा तकनीकी ढांचे पर भारी दबाव बना दिया था।
RBI और NPCI द्वारा ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट पेमेंट्स पर 0.4% चार्ज लगाने के पीछे मुख्य कारण सिस्टम की तकनीकी सुरक्षा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को लंबे समय तक टिकाऊ बनाना है।
पीक ऑवर्स में सर्वर क्रैश और ‘पेमेंट पेंडिंग’ की समस्या खत्म करना
जब करोड़ों लोग एक साथ त्योहारों, सेल या शाम के वक्त पेमेंट करते हैं, तो बैंकों और पेमेंट ऐप्स के सर्वर पर भारी ट्रैफिक लोड आता है।
  • सर्वर ओवरलोड होने पर पैसा खाते से कट जाता है, लेकिन व्यापारी तक नहीं पहुंचता (ट्रांजैक्शन पेंडिंग)।
  • जुटाए गए शुल्क का उपयोग बैंक अपने कोर बैंकिंग सॉल्यूशन (CBS) सर्वर को अपग्रेड करने और हाई-स्पीड डेटा पाइपलाइन बिछाने में करेंगे, जिससे पेमेंट फेलियर दर शून्य के करीब पहुंचे।
 साइबर सुरक्षा और फ्रॉड डिटेक्शन का मजबूत घेरा
लेनदेन का आकार और दायरा बढ़ने के साथ डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी और हैकिंग के प्रयास भी बढ़े हैं।
 क्लाउड और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार
करोड़ों ट्रांजैक्शन का डेटा सुरक्षित रखना और तुरंत प्रोसेस करना साधारण सर्वरों के बस की बात नहीं है।
  • देश के भीतर सुरक्षित डेटा सेंटर, बैकअप सर्वर और डिजास्टर रिकवरी (DR) साइट्स का संचालन बेहद खर्चीला काम है।
  • यह फंड बैंकों और पेमेंट कंपनियों को बिना किसी बाहरी सब्सिडी के अपने तकनीकी ढांचे का विस्तार करने में मदद करेगा।
वैश्विक नेटवर्क से कनेक्टिविटी (11 देशों में विस्तार)
UPI अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है; फ्रांस, यूएई, सिंगापुर और उज्बेकिस्तान समेत 11 देशों में इसका इस्तेमाल हो रहा है।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेमेंट गेटवे को सुरक्षित और तेज बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय साइबर सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है।
  • इसके लिए विदेशी स्विचिंग नेटवर्क और हाई-एंड एपीआई (API) इंटीग्रेशन में निरंतर निवेश की जरूरत होती है।
किनके बीच बंटेगा यह फंड?
0.4% की यह राशि किसी एक संस्था के पास नहीं जाएगी, बल्कि पेमेंट सिस्टम से जुड़े सभी प्रमुख तकनीकी स्तंभों में विभाजित होगी:
  • अधिग्रहणकर्ता बैंक और ऐप्स (Acquiring Apps/Banks): Google Pay, PhonePe, Paytm और मर्चेंट बैंक, जो क्यूआर कोड और पेमेंट गेटवे संभालते हैं।
  • जारीकर्ता बैंक (Issuing Banks): जहां ग्राहक का बचत खाता है और जहां से पैसा सुरक्षित रूप से ट्रांसफर होता है।
  • नेटवर्क ऑपरेटर (NPCI): जो पूरे भारत में इस डिजिटल स्विच और क्लियरिंग हाउस का संचालन करता है।                                       प्याज के दाम होंगे कम, अगले हफ्ते से मिलेगी राहत
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