माइग्रेन सिर्फ सामान्य सिरदर्द नहीं है, बल्कि यह एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जो रोजमर्रा की जिंदगी, काम और नींद को प्रभावित कर सकती है। दुनियाभर में करीब हर सात में से एक व्यक्ति माइग्रेन से प्रभावित माना जाता है। खास बात यह है कि महिलाओं में माइग्रेन होने की संभावना पुरुषों की तुलना में करीब तीन गुना अधिक बताई जाती है।
माइग्रेन क्या है और इसके लक्षण क्या हैं?
माइग्रेन में दिमाग कुछ बदलावों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है। इसके कारण तेज सिरदर्द के साथ मतली, उल्टी, चक्कर, थकान और ब्रेन फॉग जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। कुछ लोगों में माइग्रेन से पहले चेतावनी के संकेत दिखाई देते हैं। इसे प्रोड्रोम फेज कहा जाता है। इस दौरान बार-बार जम्हाई आना, अत्यधिक थकान या गर्दन में दर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं। कुछ मरीजों को ऑरा का अनुभव भी होता है, जिसमें आंखों के सामने चमकती या टेढ़ी-मेढ़ी रेखाएं और धब्बे दिखाई दे सकते हैं।
महिलाओं में माइग्रेन ज्यादा क्यों होता है?
महिलाओं में माइग्रेन बढ़ने की एक प्रमुख वजह हार्मोनल बदलाव मानी जाती है। किशोरावस्था में पीरियड्स शुरू होने के बाद कई लड़कियों में माइग्रेन की समस्या बढ़ सकती है। पीरियड्स से ठीक पहले एस्ट्रोजन के स्तर में तेजी से होने वाली गिरावट भी कुछ महिलाओं में माइग्रेन को ट्रिगर कर सकती है। वहीं, पेरिमेनोपॉज यानी मेनोपॉज से पहले के दौर में हार्मोन में होने वाले उतार-चढ़ाव से भी माइग्रेन की समस्या बढ़ सकती है। मेनोपॉज के बाद कुछ महिलाओं में हार्मोन के स्तर स्थिर होने के साथ माइग्रेन के दौरे कम हो सकते हैं।
तनाव और नींद भी हो सकते हैं कारण
माइग्रेन को ट्रिगर करने वाले कारण हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। तनाव, नींद में बदलाव, लंबे समय तक सोना, समय पर खाना न खाना और शरीर में पानी की कमी इसके संभावित ट्रिगर हो सकते हैं। दिलचस्प बात यह है कि कई बार तनाव खत्म होने के बाद मिलने वाला आराम भी माइग्रेन का कारण बन सकता है। मौसम में बदलाव और तापमान या वायुमंडलीय दबाव में परिवर्तन भी कुछ लोगों में माइग्रेन को ट्रिगर कर सकता है।
माइग्रेन से बचने के लिए क्या करें?
माइग्रेन को पूरी तरह रोकना हर व्यक्ति के लिए संभव नहीं होता, लेकिन कुछ आदतों से इसके ट्रिगर को पहचानने और मैनेज करने में मदद मिल सकती है।
- रोजाना एक जैसी नींद की दिनचर्या बनाए रखें।
- लंबे समय तक खाली पेट न रहें और समय पर भोजन करें।
- पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें।
- नियमित लेकिन अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम करें।
- तनाव को कम करने की कोशिश करें।
- माइग्रेन होने से पहले के 1-2 दिनों में हुई गतिविधियों को नोट करें।
- बार-बार माइग्रेन होने पर डॉक्टर से सलाह लें।
विशेषज्ञों के अनुसार, हर व्यक्ति के माइग्रेन के ट्रिगर अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी एक खाद्य पदार्थ या आदत को सभी मरीजों के लिए जिम्मेदार मानने के बजाय अपनी दिनचर्या और लक्षणों का रिकॉर्ड रखना ज्यादा उपयोगी हो सकता है।


