नई दिल्ली: भारत सरकार के महत्वाकांक्षी ‘जल जीवन मिशन’ (JJM) ने देश के ग्रामीण इलाकों में पेयजल की उपलब्धता के मामले में एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया है। वर्ष 2019 में मिशन की शुरुआत के समय जहां मात्र 16.7% ग्रामीण परिवारों के पास नल का कनेक्शन था, वहीं 3 मार्च 2026 तक यह आंकड़ा बढ़कर 81.71% तक पहुँच गया है। वर्तमान में देश के कुल 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से लगभग 15.82 करोड़ परिवारों को उनके घर पर ही निर्धारित गुणवत्ता का पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार इस मिशन को राज्यों के साथ साझेदारी में एक सार्वभौमिक दृष्टिकोण के साथ लागू कर रही है, जिसमें अनुसूचित जाति और जनजाति बहुल क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है। आंकड़ों के अनुसार अनुसूचित जाति बहुल बस्तियों के 81.81% और अनुसूचित जनजाति बहुल बस्तियों के 75.18% परिवारों को अब तक इस योजना का सीधा लाभ मिल चुका है।
मिशन की सफलता के साथ-साथ सरकार ने पारदर्शिता और कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है। जल जीवन मिशन के तहत वित्तीय अनियमितताओं और घटिया निर्माण की प्राप्त शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक 1,020 ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया गया है या उन पर भारी आर्थिक दंड लगाया गया है। इसके अतिरिक्त, लापरवाही बरतने वाले 635 विभागीय अधिकारियों के विरुद्ध निलंबन और विभागीय जांच जैसी सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की गई है, जबकि 155 तृतीय पक्ष निरीक्षण एजेंसियों को भी पैनल से हटा दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक शिकायत की विधिवत जांच और जमीनी सत्यापन किया जा रहा है ताकि मिशन की जवाबदेही बनी रहे।
पेयजल की शुद्धता बनाए रखने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS: 10500) के मानकों को बेंचमार्क बनाया गया है। राज्यों को अपने वार्षिक बजट का 2% हिस्सा विशेष रूप से जल की गुणवत्ता की निगरानी, प्रयोगशालाओं के सुदृढ़ीकरण और फील्ड टेस्ट किट के वितरण पर खर्च करने का निर्देश दिया गया है। एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा किए गए कार्यक्षमता आकलन में यह सुखद परिणाम सामने आया है कि 81% घरों को मिलने वाला पानी पूरी तरह से रासायनिक संक्रमण से मुक्त है और अधिकांश परिवारों को निर्धारित समय पर नियमित जलापूर्ति मिल रही है। वर्तमान में शेष 3.54 करोड़ परिवारों तक नल कनेक्शन पहुँचाने का कार्य विभिन्न चरणों में है, जिसे जल्द पूरा करने के लिए ‘जल सेवा आकलन’ जैसी पहलों के माध्यम से निरंतर निगरानी की जा रही है।


