जशपुर पुलिस की प्रभावी पैरवी से कुनकुरी न्यायालय का बड़ा फैसला
कुनकुरी न्यायालय के विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एवं पॉक्सो) भानु प्रताप सिंह की अदालत ने नाबालिग बालिका को भगाने और दुष्कर्म करने के मामले में आरोपी सन्नु चौहान उर्फ सोनू चौहान (32 वर्ष) को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। जशपुर पुलिस की त्वरित कार्रवाई, वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन और अभियोजन पक्ष की मजबूत पैरवी के आधार पर अदालत ने यह फैसला सुनाया।
रथ मेला देखने गई थी पीड़िता, झांसा देकर भगा ले गया था आरोपी
मामले का विवरण देते हुए बताया गया कि 28 जून 2025 को 14 वर्षीय पीड़िता अपनी छोटी बहन के साथ रथ मेला देखने गई थी। देर शाम तक जब पीड़िता घर नहीं पहुंची, तो परिजनों ने पूछताछ की। डरी-सहमी छोटी बहन ने बाद में परिजनों को बताया कि आरोपी सोनू चौहान उसकी बड़ी बहन को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया है। आरोपी द्वारा धमकी दिए जाने के कारण उसने तुरंत परिजनों को इसकी जानकारी नहीं दी थी।
परिजनों द्वारा खोजबीन के बाद 30 जून 2025 को चौकी कोल्हेनझरिया (थाना तुमला) में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर तत्काल जांच शुरू की।
24 घंटे के भीतर पुलिस ने पीड़िता को छुड़ाया
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई की और 1 जुलाई 2025 को पीड़िता को आरोपी के कब्जे से सकुशल बरामद कर लिया। महिला पुलिस अधिकारी के समक्ष दिए गए बयानों में पीड़िता ने बताया कि आरोपी उसे शादी और प्यार का झांसा देकर भगा ले गया था और उसके साथ गलत काम किया।
पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया। जांच के दौरान एफएसएल रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्यों को एकत्रित कर कोर्ट में मजबूत चार्जशीट दाखिल की गई।
अदालत ने सुनाई दोहरी सजा
मामले की सुनवाई करते हुए विशेष न्यायालय (एससी/एसटी व पॉक्सो) कुनकुरी ने आरोपी सन्नु चौहान को दोषी ठहराते हुए सजा का ऐलान किया:
- धारा 6 पॉक्सो एक्ट के तहत 20 वर्ष का कठोर कारावास एवं ₹1,000 का अर्थदंड।
- धारा 137(2) बीएनएस के तहत 05 वर्ष का कठोर कारावास एवं ₹1,000 का अर्थदंड।
अदालत के आदेशानुसार आरोपी की दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अर्थदंड की राशि जमा न करने पर आरोपी को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
कुशल विवेचना और सशक्त पैरवी का परिणाम
इस मामले में तत्कालीन चौकी प्रभारी स.उ.नि. टेकराम सारथी और डीएसपी अजाक भावेश कुमार समरथ की कुशल विवेचना और वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन की अहम भूमिका रही। वहीं, लोक अभियोजक भरत राम यादव द्वारा अदालत में प्रस्तुत की गई सशक्त पैरवी के बल पर आरोपी को कठोर सजा दिलाने में सफलता प्राप्त हुई।

