भारतीय लोक प्रशासन संस्थान छत्तीसगढ़ शाखा और कलेक्टर रोहित व्यास के संयुक्त प्रयास से बना जिले के मिनी गजेटियर जैसा यह रिपोर्ट।
कलेक्टर रोहित व्यास ने सहयोगी टीम और प्रमुख शिक्षण संस्थानों को भेंट की रिपोर्ट की प्रतियां।
जशपुर नगर:
भारतीय लोक प्रशासन संस्थान छत्तीसगढ़ शाखा द्वारा तैयार ‘जशपुर जिले में शासन एवं विकास’ पर केंद्रित विशेष अध्ययन रिपोर्ट ‘जशपुर : एक परिचय ‘की प्रतियां आज कलेक्टर रोहित व्यास के द्वारा इसके निर्माण में सहयोग देने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रदान की। इसके साथ ही आम पाठकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के उपयोग हेतु इस महत्वपूर्ण रिपोर्ट को जिला ग्रंथालय, जिला संग्रहालय, एनईएस कॉलेज, गर्ल्स कॉलेज, स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय सहित अन्य विकासखण्डों के शैक्षणिक संस्थाओं के पुस्तकालयों को भी उपलब्ध कराया गया।
इस रिपोर्ट के निर्माण हेतु भारतीय लोक प्रशासन छत्तीसगढ़ रीजनल शाखा के चेयरमैन और भारतीय प्रशासनिक सेवा के रिटायर्ड अधिकारी सुयोज्य कुमार मिश्रा और वाइस चेयरमैन डॉ. इंदिरा मिश्रा का जशपुर आगमन भी हुआ था।
कलेक्टर रोहित व्यास के मार्गदर्शन में तैयार हुआ जिले का ‘मिनी गजेटियर’
कलेक्टर रोहित व्यास के दिशा-निर्देशन और पुलिस अधीक्षक लाल उम्मेद सिंह, सीईओ जिला पंचायत अभिषेक कुमार, डीएफओ शशि कुमार, एसडीएम विश्वास राव मस्के एवं जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारियों के संयुक्त प्रयासों से यह रिपोर्ट मूर्त रूप ले सकी है। वर्ष 1998 में रायगढ़ से पृथक होकर अस्तित्व में आए जशपुर जिले का अब तक कोई औपचारिक गजेटियर उपलब्ध नहीं था। ऐसे में IIPA की इस पहल के तहत तैयार की गई यह रिपोर्ट जिले के लिए एक ‘मिनी गजेटियर’ की तरह काम करेगी। इसमें स्वतंत्रता के बाद से लेकर अब तक जिले में हुए प्रशासनिक बदलावों, प्रशासनिक कार्यप्रणालियों, शासन व्यवस्था के सफर और समग्र विकास का विस्तृत अध्ययन संकलित किया गया है। साथ ही यह भविष्य के नीति-निर्माण और बेहतर प्रशासन के लिए एक ब्लूप्रिंट भी प्रस्तुत करती है।
सहयोगियों को किया गया सम्मानित
इस अध्ययन रिपोर्ट को तैयार करने में जमीनी स्तर पर अहम भूमिका निभाने वाली टीम के सदस्यों सहित जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र सिन्हा को रिपोर्ट की प्रतियां भेंट की गई।
प्रशासन का मानना है कि विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों व पुस्तकालयों में इस प्रति के पहुंचने से जशपुर की विशिष्ट सांस्कृतिक,भौगोलिक और प्रशासनिक पृष्ठभूमि को समझने में युवाओं व शोधार्थियों को काफी मदद मिलेगी।


