नई दिल्ली: 1 अक्टूबर 2026 से आम नागरिकों के दैनिक जीवन, रसोई के बजट, बैंकिंग और जरूरी सरकारी दस्तावेजों से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियमों में बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा लागू किए जा रहे इन नए प्रावधानों का सीधा असर घरेलू गैस सब्सिडी, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की ब्याज दरों और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया पर पड़ेगा।
LPG सब्सिडी: बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अनिवार्य, नहीं कराया तो मिलेगा महंगा सिलेंडर
घरेलू रसोई गैस सब्सिडी को लेकर सरकार ने कड़ा कदम उठाया है:
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बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन (BAA): सब्सिडी का लाभ जारी रखने के लिए उपभोक्ताओं को बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण कराना अनिवार्य होगा। 19 सितंबर 2026 तक लगभग 89.9 प्रतिशत सक्रिय उपभोक्ता यह प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं।
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सप्लाई नहीं रुकेगी, लेकिन सब्सिडी बंद होगी: यदि उपभोक्ता यह प्रक्रिया पूरी नहीं करते हैं, तब भी उन्हें गैस सिलेंडर मिलता रहेगा, लेकिन उन्हें पूरा बाजार भाव (बिना सब्सिडी वाला रेट) चुकाना होगा। बैंक खाते में मिलने वाली सब्सिडी रोक दी जाएगी।
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उद्देश्य: सब्सिडी का लाभ केवल वास्तविक पात्र परिवारों तक पहुंचाना और घरेलू सिलेंडरों के व्यावसायिक दुरुपयोग को रोकना।
बैंक एफडी: बल्क डिपॉजिट की सीमा बढ़कर ₹3 करोड़, ब्याज दरों में आएगी पारदर्शिता
रिजर्व बैंक ने बैंकों के बल्क डिपॉजिट (Bulk Deposit) नियमों में संशोधन किया है:
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नई सीमा लागू: अब 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की एफडी को बल्क डिपॉजिट माना जाएगा। पहले यह सीमा 2 करोड़ रुपये थी। बैंक इन पर अपनी आवश्यकतानुसार अलग ब्याज दरें तय कर सकेंगे।
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सुबह 10:10 तक वेबसाइट पर दरें दिखाना अनिवार्य: बैंकों को प्रत्येक कार्यदिवस (Working Day) पर सुबह 10:00 बजे तक एफडी की दरें अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपडेट करनी होंगी। इसके लिए 10 मिनट का ग्रेस पीरियड दिया गया है, यानी सुबह 10:10 बजे तक नई दरें सार्वजनिक रूप से दिखनी जरूरी होंगी।
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शाखाओं में एकसमान दर: एक ही तारीख पर समान अवधि और समान राशि वाली एफडी पर बैंक की सभी शाखाओं में एक जैसी ब्याज दर मिलेगी, जिससे शाखा स्तर पर होने वाले अंतर समाप्त होंगे।
जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण: 1 अक्टूबर से नियम होंगे सख्त, देरी पर मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी
संसद द्वारा पारित जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026 के नए प्रावधान 1 अक्टूबर से प्रभावी हो रहे हैं:
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2 साल से ज्यादा देरी: यदि जन्म या मृत्यु के 2 वर्ष से अधिक समय बाद पंजीकरण के लिए आवेदन किया जाता है, तो इसके लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (First Class Judicial Magistrate) का औपचारिक आदेश प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
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1 से 2 साल के भीतर: यदि घटना के 1 से 2 वर्ष के भीतर रजिस्ट्रेशन कराया जाता है, तो इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप-जिला मजिस्ट्रेट (SDM) या अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अनुमति आवश्यक होगी। अधिकारी तथ्यों की पड़ताल और तय शुल्क जमा कराने के बाद ही अनुमति देंगे।
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उद्देश्य: जन्म एवं मृत्यु की घटनाओं का समय पर शत-प्रतिशत सटीक पंजीकरण सुनिश्चित करना और फर्जी प्रमाण पत्रों पर लगाम लगाना। बैंक कर्मचारियों की तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का , लगातार 5 दिन बंद रह सकते हैं बैंक

